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ढाका में सरकारी कर्मचारियों पर पुलिसिया कार्रवाई

चुनाव से ठीक पहले एक और टकराव की स्थिति उत्पन्न

ढाकाः बांग्लादेश की राजधानी ढाका आज एक बार फिर भारी राजनीतिक और प्रशासनिक उथल-पुथल की गवाह बनी। हाल के महीनों में सत्ता परिवर्तन के दौर से गुजरे इस देश में शांति बहाली की कोशिशों के बीच, हजारों सरकारी कर्मचारियों के उग्र प्रदर्शन ने अंतरिम सरकार की नींव हिला दी है। ढाका की सड़कें, जो कभी सामान्य जनजीवन का हिस्सा थीं, आज सुरक्षाबलों और प्रदर्शनकारियों के बीच एक भीषण रणक्षेत्र में तब्दील हो गईं।

यह विरोध प्रदर्शन मुख्य रूप से सरकारी क्षेत्र के निम्न और मध्यम वर्गीय कर्मचारियों द्वारा आयोजित किया गया था। उनकी प्राथमिक मांग वेतन में तत्काल वृद्धि और लंबे समय से संविदा पर काम कर रहे नौकरियों के स्थायीकरण को लेकर है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों में मुद्रास्फीति और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, जिससे वर्तमान वेतन ढांचे में परिवार का गुजारा करना लगभग असंभव हो गया है। वे सरकार से पे-कमीशन की सिफारिशों को लागू करने की मांग कर रहे हैं।

घटना की शुरुआत तब हुई जब प्रदर्शनकारियों का एक विशाल समूह मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के आधिकारिक आवास जमुना की ओर मार्च करने लगा। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस ने सचिवालय और आवास के चारों ओर बहुस्तरीय बैरिकेड्स लगाए थे। जैसे ही भीड़ ने इन अवरोधों को लांघने और प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश की, पुलिस के साथ उनकी हिंसक झड़प शुरू हो गई।

भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षाबलों ने पहले लाठीचार्ज किया, लेकिन स्थिति बेकाबू होते देख आंसू गैस के गोले, रबर की गोलियां और वाटर कैनन (पानी की बौछारों) का सहारा लिया गया। जवाब में प्रदर्शनकारियों ने भी पुलिस पर पथराव किया। इस संघर्ष में दर्जनों प्रदर्शनकारी लहूलुहान हुए हैं और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को भी गंभीर चोटें आई हैं। ढाका के अस्पतालों में घायलों का तांता लगा हुआ है।

शेख हसीना सरकार के पतन के बाद सत्ता संभालने वाली मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के लिए यह अब तक की सबसे बड़ी आंतरिक चुनौती मानी जा रही है। सरकार के सामने एक तरफ कर्मचारियों की जायज आर्थिक मांगें हैं, तो दूसरी तरफ देश का खाली खजाना। सरकारी प्रवक्ताओं का कहना है कि पिछली सरकार की नीतियों और हालिया राजनीतिक अस्थिरता के कारण बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति अत्यंत नाजुक है। ऐसे में वेतन वृद्धि का कोई भी बड़ा फैसला देश की अर्थव्यवस्था पर असहनीय वित्तीय बोझ डाल सकता है।

ढाका के प्रमुख चौराहों जैसे कि शाहबाग और मोतीझील में अभी भी तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। अफवाहों और हिंसा को और भड़कने से रोकने के लिए प्रशासन ने शहर के संवेदनशील इलाकों में इंटरनेट सेवाओं को अस्थायी रूप से बाधित कर दिया है। ढाका की सड़कों पर रैपिड एक्शन बटालियन और भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई है।