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अब अंतरिक्ष अभियानों में मददगार बनने जा रहा है ए आई

नासा के रॉकेट एलॉय के अनेक थ्री डी विकल्प बताए

इससे थ्री डी प्रिंटिंग सस्ती होगी

दस करोड़ संभावनाएं बतायी

अत्यधिक गर्मी सहने वाला यौगिक

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक उच्च-प्रदर्शन वाले मेटल एलॉय (धातु मिश्र धातु) को 3D-प्रिंट करने का एक तेज़ और सस्ता तरीका खोजने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग किया है। इससे 10 करोड़ से अधिक संभावित प्रिंटिंग कॉन्फ़िगरेशन का मैन्युअल परीक्षण करने की आवश्यकता समाप्त हो गई है। यह प्रगति एयरोस्पेस क्षेत्र में व्यापक रूप से उपयोग होने वाले इस एलॉय को अधिक सामान्य व्यावसायिक उपकरणों पर प्रिंट करने योग्य बना सकती है। टीम द्वारा विकसित एआई रणनीति अन्य वैज्ञानिक समस्याओं, जैसे कि दवाओं की खोज में भी उपयोगी साबित हो सकती है। यह शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ द एएएआई कांफ्रेंस ऑन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में प्रकाशित हुआ है और इसे इनोवेशन डिप्लॉयड एप्लीकेशन अवॉर्ड भी मिला है। शोध का नेतृत्व करने वाली प्रोफेसर जाना डोप्पा ने बताया, 90 फीसद व्यावसायिक प्रिंटर इस एलॉय को प्रिंट नहीं कर सकते। इन व्यावहारिक मापदंडों की खोज से अब सामान्य प्रिंटरों का उपयोग संभव हो सकेगा।

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जीआरकॉप-42 नाम का यह मटेरियल तांबा, क्रोमियम और नाइओबियम से बना एक एलॉय है, जिसे नासा ने अत्यधिक गर्मी और कुशल हीट ट्रांसफ़र वाले वातावरण के लिए विकसित किया था। उच्च तापीय चालकता और मजबूती के कारण इसका उपयोग लिक्विड रॉकेट इंजन दहन कक्ष में होता है। हालांकि, इसे 3डी प्रिंट करने के लिए भारी लेजर शक्ति की आवश्यकता होती है, जो काफी महंगी प्रक्रिया है।

अज्जा फाधेल और शोधकर्ता नाथनिएल ज़कश्वेडर्ट, सुस्मिता बोस, अमित बंद्योपाध्याय व आर्यन देशवाल ने इस चुनौती को हल करने के लिए एआई मॉडल तैयार किया। एआई ने पूर्व में विफल रहे 37 प्रयोगों के डेटा का विश्लेषण कर केवल उन मापदंडों का सुझाव दिया जिनके सफल होने की संभावना सबसे अधिक थी। शोधकर्ताओं ने केवल 40 प्रयोगों और तीन महीनों के काम के भीतर 500 वाट की लेजर पावर पर जीआरकॉप-42 की सफल प्रिंटिंग के 6 तरीके ढूंढ निकाले। कम पावर पर प्रिंटिंग से ऊर्जा की बचत होगी, उपकरणों का घिसाव कम होगा और लागत घटेगी। साथ ही, यह तकनीक अब छोटी प्रयोगशालाओं और विश्वविद्यालयों के लिए भी सुलभ हो सकेगी। डोप्पा के अनुसार, इस एआई दृष्टिकोण का उपयोग अन्य धातुओं के निर्माण और उन वैज्ञानिक क्षेत्रों में भी किया जा सकता है जहां प्रयोग बहुत महंगे होते हैं।

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