अमेरिकी व्यापार समझौते का खुलासा करे सरकार
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः संसद परिसर में विपक्षी दलों के भारी हंगामे और विरोध प्रदर्शन ने देश के राजनीतिक पारे को एक बार फिर चरम पर पहुँचा दिया है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी सांसदों ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर के ‘मकर द्वार’ के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला। इस प्रदर्शन का मुख्य केंद्र भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर उपजा विवाद रहा, जिसे विपक्ष ने ट्रैप डील करार दिया है। इसके साथ ही पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के अप्रकाशित संस्मरण और विपक्षी सांसदों के निलंबन को लेकर भी तीखा विरोध दर्ज कराया गया।
लोकसभा की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित होने के तुरंत बाद, विपक्षी नेता संसद के बाहर एकत्र हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और निलंबित सांसदों सहित विपक्षी सदस्यों ने एक बड़ा बैनर थाम रखा था, जिस पर ट्रैप डील लिखा था। विपक्ष का आरोप है कि अमेरिका के साथ हुआ यह व्यापार समझौता भारतीय हितों के खिलाफ है और इसमें देश को किसी बड़े जाल में फँसाने की संभावना है। प्रदर्शनकारियों ने तानाशाही नहीं चलेगी और लोकतंत्र की हत्या बंद करो जैसे नारे लगाए।
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद परिसर से निकलते समय प्रधानमंत्री मोदी पर तंज कसते हुए मीडिया से केवल इतना कहा, जो उचित समझो वह करो। इससे पहले बुधवार को उन्होंने पूर्व सेना प्रमुख एम.एम. नरवणे के उस संस्मरण का हवाला दिया था, जिसे अभी तक प्रकाशित नहीं होने दिया गया है। राहुल गांधी का आरोप है कि 2020 के भारत-चीन संघर्ष के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए सारा बोझ सेना प्रमुख पर डाल दिया था। विपक्ष का दावा है कि सरकार इस संस्मरण के प्रकाशन को इसलिए रोक रही है क्योंकि इसमें चीन सीमा पर सरकार की विफलताओं का कच्चा चिट्ठा है।
इस विरोध प्रदर्शन की एक और प्रमुख वजह आठ विपक्षी सांसदों का निलंबन है। इन सांसदों को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान अनुचित व्यवहार के आरोप में निलंबित किया गया था। कांग्रेस के सचेतक मणिकम टैगोर, जो खुद भी निलंबित हैं, ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी विदेशी शक्तियों के दबाव में हैं और सदन में विपक्ष का सामना करने से बच रहे हैं।
सोमवार से ही लोकसभा में गतिरोध बना हुआ है। विपक्ष इस बात पर अड़ा है कि राहुल गांधी को सदन में नरवणे के संस्मरण को उद्धृत करने की अनुमति दी जाए। गुरुवार को जब प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित कर दिया गया, तो तनाव और बढ़ गया। विपक्ष इसे संसदीय परंपराओं का उल्लंघन मान रहा है। यह विरोध प्रदर्शन संकेत देता है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर और बाहर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच यह टकराव और अधिक उग्र होने वाला है।