जापान में 6.4 तीव्रता का भूकंप क प्रभाव
टोक्योः लगभग पाँच घंटे पहले, जापान के उत्तरी द्वीप होक्काइडो के तटीय क्षेत्र में रिक्टर पैमाने पर 6.4 तीव्रता का एक शक्तिशाली भूकंप दर्ज किया गया। भूकंप का केंद्र समुद्र तल से लगभग 40 किलोमीटर नीचे था। हालांकि इस तीव्रता का भूकंप विनाशकारी हो सकता था, लेकिन जापान की उन्नत तकनीक और पूर्व-तैयारी ने एक बार फिर बड़े नुकसान को टालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
जापान का अर्ली वार्निंग सिस्टम दुनिया में सबसे सटीक माना जाता है। इस भूकंप के दौरान, प्राथमिक तरंगों का पता चलते ही प्रणाली ने मुख्य झटके आने से 30 सेकंड पहले ही लाखों लोगों के स्मार्टफोन, टेलीविजन और रेडियो पर चेतावनी भेज दी। ये कुछ सेकंड लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने, गैस बंद करने और भारी सामान से दूर हटने के लिए पर्याप्त साबित हुए।
जापान की भौगोलिक स्थिति प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर पर है, जहाँ टेक्टोनिक प्लेटों की हलचल सबसे अधिक होती है। 6.4 तीव्रता का यह झटका इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को दर्शाता है। भूकंप के तुरंत बाद, सरकार की प्राथमिकता परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की स्थिति स्पष्ट करना थी।
आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, फुकुशिमा दाइची सहित अन्य परमाणु केंद्रों में कोई रिसाव या संरचनात्मक क्षति नहीं हुई है। शुरुआत में जारी किए गए सुनामी एडवाइजरी को समुद्र के स्तर में असामान्य बदलाव न दिखने पर वापस ले लिया गया, जिससे तटीय निवासियों ने राहत की सांस ली। भूकंप के कारण पुरानी इमारतों में दरारें और कुछ क्षेत्रों में ब्लैकआउट (बिजली गुल) की खबरें मिली हैं।
सुरक्षा मानकों के तहत, शिनकानसेन (बुलेट ट्रेन) और अन्य रेल सेवाओं को तुरंत रोक दिया गया ताकि पटरियों और पुलों की तकनीकी जांच की जा सके। इससे हजारों यात्री प्रभावित हुए, लेकिन सुरक्षा के प्रति जापान की जीरो टॉलरेंस नीति ने किसी भी संभावित दुर्घटना को टाल दिया।
होक्काइडो की यह घटना वैश्विक समुदाय को यह सिखाती है कि हम प्रकृति को रोक नहीं सकते, लेकिन तैयारी से उसके प्रभाव को न्यूनतम कर सकते हैं। जापान का आपदा प्रबंधन मॉडल—जिसमें सख्त बिल्डिंग कोड, नियमित ड्रिल और त्वरित संचार शामिल है—दुनिया भर के भूकंप संभावित देशों के लिए एक आदर्श ब्लूप्रिंट है।