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Ayodhya News: हाउस टैक्स के लिए अयोध्या नगर निगम की बड़ी लापरवाही, मकान के साथ लड़की को भी किया ‘सील’

अयोध्या जिले में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. राम नगरी में नगर निगम की लापरवाही देखने को मिली. दरअसल, नगर कोतवाली क्षेत्र के फतेहगंज मार्केट स्थित एक परिवार के मकान को बीते बुधवार को हाउस टैक्स बकाया होने के कारण सील कर दिया गया था. सीलिंग की कार्रवाई के दौरान मकान के अंदर में एक दिव्यांग लड़की रह गई. उसको बाहर नहीं निकाला गया. नगर निगम कर्मचारी घर पर सील लगाकर चले गए. कार्रवाई के कुछ घंटों के बाद परिवार के मुखिया रिंकू गुप्ता ने आसपास के लोगों को फोन कर बताया कि मेरी छोटी बहन, जो कान से कम सुनती है, वो मकान में ही रह गई है.

मकान और दुकान को सील किया

इसके बाद रिंकू खुद मौके पर पहुंचे. रिंकू ने देखा कि दिव्यांग बहन छत पर टहल रही थी. रिंकू ने उसका वीडियो बनाया. देखते ही देखते ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. रिंकू ने आरोप लगाया कि बुधवार दोपहर के समय नगर निगम की टीम आई थी. साथ में कुछ पुलिसकर्मी भी थे. टीम ने मेरे मकान और दुकान सील कर दिया. सीलिंग की कार्रवाई के दौरान नगर निगम कर्मचारी इतने गुस्से में थे कि उन्होंने हमें संभलने का भी समय नहीं दिया.

रिंकू गुप्ता ने बताया कि उनके मकान में प्रवेश और निकासी का एक ही द्वार है. कर्मचारियों ने मकान में निकासी द्वार पर मौजूद दुकान के शटर पर ताला लगाकर सील कर दिया. टीम के जाने के कुछ घंटे बाद उन्हें याद आया कि छोटी बहन, जो कान से कम सुनती है, वो अंदर ही रह गई है. बहुत देर बाद बहन किसी तरह दुकान की छत पर आई. उन्होंने इसकी सूचना स्थानीय थाना पुलिस को दी. सूचना मिलने पर सीओ सिटी पुलिस टीम के साथ पहुंचे. उन्होंने नगर निगम कर्मचारियों को बुलाया. उन्होंने जब दुकान पर लगी सील तोड़ी और ताला खोला, तब बहन को बाहर निकाला जा सका.

नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने दी सफाई

वहीं जब पूरे मामले को लेकर नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार से बात की गई तो टीवी9 डिजिटल से बात करते हुए उन्होंने बताया कि इस मकान का 90,800 हजार रुपए हाउस और वाटर टैक्स का बकाया था. मकान के तीन वारिसों को नगर निगम के द्वारा 17 नवंबर 2025 को नोटिस दी गई. टैक्स इंस्पेक्टर ने व्यक्तिगत रूप से संपर्क किया गया. 17 जनवरी 2026 को समाचार पत्र के माध्यम से भी मकान की कुर्की को लेकर जानकारी दी गई. 4 फरवरी को लगभग 1:30 बजे पुलिस की उपस्थिति में कुर्की की कार्रवाई की गई. इस दौरान मकान के जो दो वारिस थे, उन्होंने 30,300 रुपए दे दिया.

वहीं जो तीसरे वासिर रिंकू गुप्ता थे, उनके द्वारा टैक्स देने से मना कर दिया और कहा गया कि आप अपनी कार्रवाई कर सकते हैं. सीलिंग की कार्रवाई के समय किसी भी युवती या बच्ची का मकान में रहना नहीं पाया गया. जो वीडियोग्राफी की गई, उसमें भी देखा जा सकता है कि सीलिंग के दौरान मकान के अंदर कोई नहीं था. शाम को छह बजे ये पता चला कि एक बच्ची अंदर बंद है. जानकारी होते ही तुरंत नगर निगम की टीम को फिर से मकान पर भेजा गया. सील को तोड़कर देखा गया तो एक बच्ची अंदर थी. बच्ची को बाहर निकालकर परिजनों को सुपुर्द किया गया.

नगर आयुक्त जयेंद्र कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में जो तथ्य सामने आए कि वो किसी षड्यंत्र की ओर इशारा करते हैं. किसी दूसरे रास्ते से बच्ची को मकान के अंदर कराया गया. हम लोग इसकी जांच कर रहे हैं. अगर इस बात की पुष्टि होगी तो आरोपियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी. कुछ लोगों द्वारा नगर निगम की छवि खराब करने की कोशिश की जा रही है.

क्या बोला पीड़ित परिवार?

वहीं इस पूरे मामले को लेकर पीड़ित रिंकू गुप्ता ने कहा कि घर के आसपास चप्पे-चप्पे पर CCTV कैमरे लगे हुए हैं. उनके मकान में प्रवेश और निकासी का एक ही मार्ग है. अगर मैंने कोई गलत कार्य किया है तो उसका वीडियो सार्वजनिक किया जाए. नगर निगम अपनी गलतियों को छिपाने के लिए गलत आरोप लगा रहा है. जब सील तोड़ी गई, तब भी सभी पुलिसकर्मियों के द्वारा वीडियो रिकॉर्डिंग की गई. वीडियो में मेरी बहन अंदर से बाहर आते हुए दिख रही है.