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एलन मस्क और एक्स पर फ्रांस में कानूनी शिकंजा

कई अन्य देशों के बाद अब फ्रांस की सरकार भी गंभीर

पेरिसः सोशल मीडिया की दुनिया के सबसे प्रभावशाली और विवादित व्यक्तित्व एलन मस्क और उनके प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) के लिए आज का दिन वैश्विक स्तर पर एक बड़ी कानूनी मुसीबत लेकर आया है। पेरिस स्थित एक्स के क्षेत्रीय मुख्यालय पर फ्रांसीसी डिजिटल सुरक्षा अधिकारियों और राष्ट्रीय पुलिस की अचानक हुई छापेमारी ने तकनीकी जगत में हलचल मचा दी है।

यह कार्रवाई केवल एक सामान्य जांच नहीं है, बल्कि यह यूरोपीय संघ के डिजिटल सेवा अधिनियम और फ्रांस के कठोर डेटा गोपनीयता कानूनों के उल्लंघन की दिशा में एक बड़ा कदम है। इस छापेमारी के तुरंत बाद फ्रांसीसी अधिकारियों ने एलन मस्क को व्यक्तिगत रूप से पूछताछ के लिए एक आधिकारिक समन जारी कर दिया है, जो यह दर्शाता है कि यह मामला केवल कॉर्पोरेट जवाबदेही तक सीमित नहीं रहेगा।

फ्रांसीसी अभियोजकों और डिजिटल नियामकों की जांच का मुख्य केंद्र एक्स का वह गुप्त एल्गोरिदम है, जो सामग्री को बूस्ट या प्रमोट करता है। अधिकारियों का दावा है कि एक्स का सिस्टम जानबूझकर या लापरवाही वश गलत सूचनाओं, कट्टरपंथी विचारधाराओं और घृणास्पद भाषणों को अधिक दृश्यता प्रदान कर रहा है।

बार-बार दी गई चेतावनियों के बावजूद, प्लेटफॉर्म ने ऐसी अवैध सामग्री को हटाने या फ़िल्टर करने में जानबूझकर सुस्ती दिखाई है। इसके अलावा, एक और गंभीर आरोप यह है कि एक्स ने अपने ग्रोक जैसे एआई मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए यूरोपीय उपयोगकर्ताओं के व्यक्तिगत डेटा का उनकी स्पष्ट सहमति के बिना उपयोग किया है, जो जनरल डेटा प्रोटेक्शन रेगुलेशन का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।

खुद को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का कट्टर समर्थक बताने वाले एलन मस्क ने इस छापेमारी को सेंसरशिप और लोकतंत्र पर हमला करार दिया है। मस्क का तर्क है कि यूरोपीय सरकारें अपने एजेंडे के खिलाफ जाने वाली आवाजों को दबाने के लिए तकनीकी कंपनियों का गला घोंट रही हैं।

दूसरी ओर, फ्रांस सरकार और यूरोपीय संघ के अधिकारियों का रुख बेहद स्पष्ट है—उनका कहना है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अर्थ यह नहीं है कि कोई कंपनी कानून से ऊपर हो जाए। फ्रांस के डिजिटल मंत्री ने संकेत दिया कि टेक दिग्गजों को अपनी मनमानी छोड़कर स्थानीय कानूनों और नागरिक सुरक्षा के प्रति जवाबदेह होना ही होगा।

यह छापेमारी अन्य यूरोपीय देशों जैसे जर्मनी और इटली के लिए भी एक मिसाल बन सकती है, जो पहले से ही मस्क की नीतियों और प्लेटफॉर्म पर बढ़ती नफरत को लेकर असहमत रहे हैं। यदि अदालत में ये आरोप सिद्ध हो जाते हैं, तो एक्स पर उसके कुल वैश्विक राजस्व का 6 प्रतिशत तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जा सकता है।

अरबों डॉलर का यह जुर्माना एक्स की पहले से ही डांवाडोल वित्तीय स्थिति को और बिगाड़ सकता है। अंततः, यह पूरी घटना इस बात का प्रमाण है कि आने वाले समय में डिजिटल संप्रभुता और वैश्विक टेक कंपनियों की बेलगाम शक्तियों के बीच संघर्ष और अधिक तीव्र होने वाला है।