कांग्रेस के सरेंडर वाले आरोपों पर सरकार का पलटवार
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते को लेकर देश में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों और चुप्पी के आरोपों पर केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने न केवल विपक्ष के आरोपों को खारिज किया, बल्कि यह भी बताया कि इस डील का पहला आधिकारिक ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से क्यों किया गया।
कांग्रेस ने सरकार को घेरते हुए सवाल किया था कि यदि यह समझौता वास्तव में भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत है, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वयं इसका विवरण देश के सामने क्यों नहीं रखा? विपक्ष का मुख्य प्रहार इस बात पर था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस खबर को पहले साझा किया। कांग्रेस नेता जयराम रमेश सहित अन्य विपक्षी प्रवक्ताओं ने इसे भारत का सरेंडर करार दिया। उनका तर्क था कि ट्रंप अपनी जीत का जश्न मना रहे हैं और भारत सरकार ने दबाव में आकर उनकी शर्तें मान ली हैं, इसीलिए घोषणा वाशिंगटन से हुई।
इन तीखे सवालों का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने कूटनीतिक शिष्टाचार और तर्क का सहारा लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि चूंकि अतिरिक्त टैरिफ लगाने का फैसला अमेरिका का था, इसलिए उसे कम करने या हटाने की घोषणा भी उन्हीं की ओर से आनी स्वाभाविक थी। गोयल ने कहा, समस्या अमेरिका ने पैदा की थी, इसलिए समाधान की घोषणा भी राहत देने वाले पक्ष (ट्रंप) द्वारा ही की जानी लाजिमी थी। इसमें कुछ भी असामान्य नहीं है।
वाणिज्य मंत्री ने आगे समझाया कि जब 2025 के मध्य में ट्रंप प्रशासन ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी, तब दुनिया इसे एक टैरिफ वॉर के रूप में देख रही थी। उस समय भारत ने जवाबी बयानबाजी के बजाय धैर्य और बैक-चैनल कूटनीति का रास्ता चुना। इसी निरंतर संवाद का परिणाम है कि आज टैरिफ घटकर 18 प्रतिशत पर आ गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कूटनीति में हर कदम पर शोर मचाना आवश्यक नहीं होता; परिणाम स्वयं सफलता की कहानी कहते हैं।