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बहुचर्चित लिग्नोसैट अब अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक पहुंचा

जापान ने लॉन्च किया लकड़ी का सैटेलाइट

टोक्योः आज सुबह का सूरज अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में एक नई और अनूठी क्रांति लेकर आया। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी और क्योटो यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक ऐसा कारनामा कर दिखाया है, जिसकी कल्पना कुछ साल पहले तक नामुमकिन लगती थी। उन्होंने स्पेसएक्स के रॉकेट के जरिए दुनिया की पहली लकड़ी से बनी सैटेलाइट, जिसका नाम लिग्नोसैट है, को सफलतापूर्वक पृथ्वी की कक्षा में स्थापित कर दिया है। यह उपलब्धि न केवल जापान के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए पर्यावरण अनुकूल अंतरिक्ष अन्वेषण की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

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लिग्नोसैट का निर्माण होनोकी नाम की लकड़ी से किया गया है। यह वही लकड़ी है जिसका उपयोग जापान में सदियों से पारंपरिक समुराई तलवारों के म्यान बनाने के लिए किया जाता रहा है। वैज्ञानिकों ने परीक्षणों में पाया कि होनोकी लकड़ी अंतरिक्ष की विकट परिस्थितियों, जैसे अत्यधिक तापमान परिवर्तन और ब्रह्मांडीय विकिरण के प्रति अविश्वसनीय रूप से प्रतिरोधी है। पिछले 12 घंटों से ऑर्बिट से मिल रहे सिग्नल इस बात की पुष्टि करते हैं कि यह लकड़ी का बॉक्सनुमा उपग्रह पूरी तरह से सक्रिय है और इसके सेंसर सुचारू रूप से काम कर रहे हैं।

इस नवाचार के पीछे का सबसे बड़ा कारण अंतरिक्ष में बढ़ता मलबा और वायुमंडलीय प्रदूषण है। वर्तमान में जो धातु (एल्युमीनियम और स्टील) की सैटेलाइट्स इस्तेमाल होती हैं, वे अपना जीवनकाल पूरा करने के बाद जब पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करती हैं, तो पूरी तरह नहीं जल पातीं।

उनके जलने से एल्युमीनियम ऑक्साइड के सूक्ष्म कण पैदा होते हैं, जो ऊपरी वायुमंडल में तैरते रहते हैं और हमारी जीवनरक्षक ओजोन परत को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं। इसके विपरीत, लकड़ी की बनी यह सैटेलाइट वायुमंडल में प्रवेश करते ही किसी जलते हुए टुकड़े की तरह पूरी तरह भस्म हो जाएगी, जिससे केवल नगण्य राख बचेगी और पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होगा।

मंगल और चंद्रमा पर लकड़ी के घर लिग्नोसैट केवल एक उपग्रह नहीं, बल्कि एक भविष्यगामी प्रयोग है। वैज्ञानिक अब अगले कुछ महीनों तक इसके थर्मल (तापीय) और स्ट्रक्चरल (ढांचागत) डेटा का बारीकी से विश्लेषण करेंगे। यदि लकड़ी अंतरिक्ष के निर्वात में खुद को सुरक्षित रखने में सफल रहती है, तो यह भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर बस्तियां बसाने के लिए लकड़ी के उपयोग का मार्ग प्रशस्त करेगी। लकड़ी को वहां ले जाना हल्का होगा और यह विकिरण से सुरक्षा प्रदान करने में भी सक्षम हो सकती है। जापान की इस लकड़ी की तकनीक ने आज साबित कर दिया है कि भविष्य का विज्ञान हमारी प्राचीन परंपराओं में ही छिपा हो सकता है।