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सीबीआई अधिकारी घूसखोरी में गिरफ्तार हुआ

ओडिशा में भ्रष्टाचार, अवैध वसूली और सिंडिकेट का खुलासा

राष्ट्रीय खबर

भुवनेश्वरः ओडिशा से भ्रष्टाचार का एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है जिसने केंद्रीय जांच एजेंसी की साख पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। भ्रष्टाचार के विरुद्ध जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने वाली सीबीआई ने अपने ही विभाग के एक अधिकारी को अवैध वसूली और गलत तरीके से लाभ पहुँचाने के आरोप में गिरफ्तार किया है।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान प्रशांत कुमार पल्लई के रूप में हुई है, जो सीबीआई में सहायक उप-निरीक्षक के पद पर तैनात थे। इस मामले में केवल सीबीआई अधिकारी ही नहीं, बल्कि महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड के एक उच्च पदस्थ अधिकारी सारदा प्रसाद सेठी को भी गिरफ्तार किया गया है। इन दोनों के खिलाफ रिश्वतखोरी और एक संगठित सिंडिकेट चलाने के गंभीर आरोप लगे हैं।

जांच और विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, महानदी कोलफील्ड्स के अधिकारी सेठी के खिलाफ विभिन्न परिवहन कंपनियों से रिश्वत लेने का मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि सेठी परिवहन कंपनियों को अवैध रूप से लाभ पहुँचाने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करते थे। वे कोयले की ढुलाई के दौरान तय सीमा से अधिक मात्रा में कोयला ले जाने की अनुमति देते थे, जो नियमों का खुला उल्लंघन था।

इतना ही नहीं, इस भ्रष्टाचार के खेल में गुणवत्ता से भी समझौता किया जा रहा था। सेठी अक्सर उच्च गुणवत्ता वाले कोयले को निम्न श्रेणी का बताकर या निम्न गुणवत्ता वाले कोयले को उच्च श्रेणी का प्रमाण पत्र देकर संबंधित कंपनियों से मोटी रकम वसूलते थे। इस पूरे अवैध कारोबार को सुचारू रूप से चलाने के लिए उन्हें एक ऐसे साथी की जरूरत थी जो उन्हें कानूनी जांच से बचा सके, और यहीं से एएसआई प्रशांत कुमार पल्लई की भूमिका शुरू हुई।

आरोपों के मुताबिक, एएसआई प्रशांत कुमार पल्लई इस भ्रष्टाचार चक्र के मुख्य संरक्षक थे। सेठी उन्हें नियमित रूप से भारी रिश्वत देते थे। बदले में, पल्लई अपनी स्थिति का फायदा उठाकर सेठी को विभिन्न जांच एजेंसियों की नजरों से बचाते थे और उन पर होने वाली संभावित कानूनी कार्यवाहियों को रोकते थे।

हैरान करने वाली बात यह भी सामने आई है कि पल्लई ने सेठी को उनके मनचाहे क्षेत्र में स्थानांतरित करवाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, ताकि यह सिंडिकेट बिना किसी बाधा के चलता रहे। पल्लई न केवल रिश्वत लेते थे, बल्कि वे जांच की गोपनीय जानकारियों को साझा करके सेठी को ‘सुरक्षित’ रखने का काम करते थे।

इस सिंडिकेट की भनक सीबीआई के उच्चाधिकारियों को गुप्त सूचना के माध्यम से लगी। अपनी ही एजेंसी के भीतर पनप रहे इस भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करने के लिए सीबीआई ने एक विशेष जाल बिछाया। जांच एजेंसी ने सेठी और एएसआई पल्लई को रंगे हाथों पकड़ने के लिए पुख्ता रणनीति तैयार की। अंततः, छापेमारी के दौरान पर्याप्त सबूतों और संदिग्ध लेन-देन के साथ एएसआई प्रशांत कुमार पल्लई को गिरफ्तार कर लिया गया।