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ढाई सौ करोड़ में मिलावटी घी की आपूर्ति

तिरुपति लड्डू विवाद में सीबीआई की चार्जशीट में खुलासा

राष्ट्रीय खबर

हैदराबादः तिरुपति मंदिर के प्रसादम लड्डू में मिलावट के मामले ने एक नया मोड़ ले लिया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने इस मामले में नेल्लोर की भ्रष्टाचार निरोधक अदालत में अपनी अंतिम चार्जशीट दाखिल कर दी है। सीबीआई के दावों ने न केवल श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाई है, बल्कि भ्रष्टाचार के एक बड़े नेटवर्क का भी पर्दाफाश किया है।

प्रमुख आरोप और आंकड़े चार्जशीट के अनुसार, साल 2021 से 2024 के बीच तिरुपति मंदिर में लगभग 68 लाख किलो मिलावटी घी की आपूर्ति की गई थी। इस पूरे घोटाले की कुल अनुमानित राशि 250 करोड़ रुपये है। सीबीआई ने कुल 36 लोगों को आरोपी बनाया है, जिनमें मंदिर प्रबंधन समिति के 9 वरिष्ठ अधिकारी और 5 डेयरी विशेषज्ञ शामिल हैं।

जांच में यह बेहद चौंकाने वाली बात सामने आई है कि घी बनाने वाली उत्तराखंड की उस डेयरी ने पिछले तीन वर्षों में घी बनाने के लिए दूध या मक्खन की एक बूंद भी नहीं खरीदी थी। इसके बजाय, भारी मात्रा में पाम ऑयल, पाम कर्नेल और विभिन्न रसायनों का उपयोग किया गया था। दिल्ली के एक व्यापारी ने इस मिश्रण को असली घी जैसी महक और स्वाद देने के लिए मोनोडाइग्लिसराइड, एसिटिक एसिड एस्टर और कृत्रिम सुगंध की आपूर्ति की थी।

लैब रिपोर्ट और पशु चर्बी का दावा नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की जांच रिपोर्ट के अनुसार, इस मिलावटी घी का गुणवत्ता सूचकांक मात्र 19.72 पाया गया, जबकि मानक के अनुसार यह न्यूनतम 98 होना चाहिए। सीबीआई ने यह भी दावा किया कि जिस टैंकर से घी की आपूर्ति की जाती थी, उनमें पशु चर्बी के अवशेष मिले हैं।

आरोप है कि मंदिर के वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों ने सब कुछ जानते हुए भी इस मिलावट को मंजूरी दी। वनस्पति वसा की मौजूदगी के सबूत मिटाने और इस भ्रष्टाचार को जारी रखने के लिए आरोपियों ने मोटी रकम रिश्वत के रूप में ली थी। यह विवाद तब शुरू हुआ था जब आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने पिछली सरकार पर प्रसादम में पशु चर्बी के इस्तेमाल का आरोप लगाया था, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सीबीआई ने जांच संभाली