Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
IMD Weather Forecast: अगले 6 दिनों तक दिल्ली में गर्मी का सितम, जानें आपके राज्य में कैसा रहेगा मौसम... MP High Court News: कोर्ट ने वकील की गलती पर दिया मानवीय दंड, कहा- अनाथालय जाकर बांटें खुशियां Indore Crime News: उर्मिला सैनी हत्याकांड, आरोपी पति ने बेटी को एटीएम देकर फरार होने का बनाया प्लान राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद अब 'लैंड डील' पर सवाल, SIT के पास पहुंचे दस्तावेजों के नए सबूत Mumbai News: बोरिवली रेलवे स्टेशन पर घुटनों के बल बैठा युवक, वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल शराबबंदी पर पुलिस का प्रहार: वैशाली में दरोगा की करतूत, आर्मी जवान को बनाया निशाना सुप्रीम कोर्ट का सख्त एक्शन: पार्श्वनाथ डेवलपर्स के डायरेक्टरों के बैंक अकाउंट फ्रीज, जारी किया वारं... यूपी पंचायत चुनाव: ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट की सुनवाई टली उद्धव ठाकरे का बड़ा ऐलान: सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के आंदोलन को दिया समर्थन Badrinath News: दान में हेराफेरी के आरोप में मंदिर समिति के कर्मचारी पर गिरी गाज, पुलिस हिरासत में प...

प्राचीन महासागर ऑक्सीजन से भरपूर थे

जीवाश्म एवं अन्य वैज्ञानिक तथ्यों से मिली जानकारी

  • अरब सागर और प्रशांत महासागर का अंतर

  • वर्तमान खतरों का भी इससे खुलासा हो गया

  • प्राचीन सुक्ष्म प्लावकों में छिपा था यह राज

राष्ट्रीय खबर

रांचीः साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय (यूके) और रटगर्स विश्वविद्यालय (यूएसए) के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए एक नवीनतम अध्ययन ने जलवायु परिवर्तन और समुद्री स्वास्थ्य के बीच के पारंपरिक संबंधों को चुनौती दी है। शोध के अनुसार, लगभग 16 मिलियन (1.6 करोड़) वर्ष पहले अरब सागर आज की तुलना में कहीं अधिक ऑक्सीजन युक्त था, जबकि उस समय पृथ्वी का तापमान वर्तमान की तुलना में काफी अधिक था।

आमतौर पर यह माना जाता है कि बढ़ते तापमान से समुद्र में ऑक्सीजन का स्तर कम होता है (डीऑक्सीजनेशन)। हालांकि, अरब सागर के प्राचीन जीवाश्मों के विश्लेषण से पता चला है कि ऑक्सीजन के स्तर में भारी गिरावट तब नहीं आई जब जलवायु गर्म थी, बल्कि इसके लाखों साल बाद आई जब जलवायु ठंडी होने लगी थी। यह खोज डीऑक्सीजनेशन के सरल नियम पर सवाल उठाती है।

देखें इससे संंबंधित पुराना वीडियो

वैज्ञानिकों ने पाया कि शक्तिशाली मानसून, समुद्री धाराओं में बदलाव और विभिन्न समुद्रों के बीच जल का आदान-प्रदान ऑक्सीजन के स्तर को निर्धारित करने में तापमान से अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। लंबे समय में, महासागरों के कुछ हिस्सों में ऑक्सीजन का स्तर फिर से बढ़ सकता है, भले ही वैश्विक तापमान में वृद्धि जारी रहे।

शोधकर्ताओं ने अरब सागर की तलछट से प्राप्त फोरामिनिफेरा नामक सूक्ष्म प्लवक के जीवाश्मों का अध्ययन किया। इन जीवाश्मों के खोल में संरक्षित रासायनिक संकेतों के माध्यम से वैज्ञानिकों ने लाखों साल पहले के समुद्री जल में ऑक्सीजन के स्तर का अनुमान लगाया।

यह अध्ययन मायोसीन क्लाइमैटिक ऑप्टिमम पर केंद्रित था, जो लगभग 17 से 14 मिलियन वर्ष पूर्व की अवधि थी। साउथेम्प्टन विश्वविद्यालय की डॉ. एलेक्जेंड्रा औडरसेट के अनुसार, एमसीओ की वायुमंडलीय स्थितियां और तापमान वैसा ही था जैसा वैज्ञानिकों ने वर्ष 2100 के बाद के लिए अनुमान लगाया है। इसलिए, उस कालखंड का अध्ययन हमें भविष्य की तैयारी में मदद कर सकता है।

शोध में पाया गया कि अरब सागर का व्यवहार प्रशांत महासागर के कम ऑक्सीजन वाले क्षेत्रों से अलग था। जबकि प्रशांत महासागर उस समय अच्छी तरह से ऑक्सीजन युक्त था, अरब सागर में ऑक्सीजन का स्तर मध्यम था, जो आज की सबऑक्सिक (ऑक्सीजन की अत्यंत कमी) स्थिति से बेहतर था। अरब सागर में ऑक्सीजन की भारी कमी लगभग 12 मिलियन वर्ष पहले शुरू हुई, जो प्रशांत महासागर की तुलना में लगभग 2 मिलियन वर्ष देरी से हुई।

पिछले 50 वर्षों में, वैश्विक तापमान बढ़ने के कारण दुनिया भर के समुद्रों में प्रति दशक 2 प्रतिशत ऑक्सीजन की कमी आई है। हालांकि, यह नया शोध बताता है कि भविष्य के समुद्री ऑक्सीजन स्तर का अनुमान लगाना जटिल है। डॉ. अन्या हेस (जॉर्ज मेसन यूनिवर्सिटी) का कहना है कि वैश्विक मॉडल जो केवल वार्मिंग पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वे स्थानीय कारकों (जैसे मानसून और जल संचलन) की अनदेखी कर सकते हैं जो वार्मिंग के प्रभाव को कम या ज्यादा कर सकते हैं।

#समुद्रीविज्ञान #जलवायुपरिवर्तन #अरबसागर #पर्यावरण #ग्लोबलवार्मिंग, #MarineScience #ClimateChange #ArabianSea #OceanOxygen #Paleoclimate