अरुणाचल की लोहित घाटी में भीषण दावानल
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी भारत के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भारतीय वायुसेना ने एक बार फिर अपनी अदम्य वीरता का परिचय दिया है। अरुणाचल प्रदेश की लोहित घाटी के जंगलों में लगी भीषण आग को नियंत्रित करने के लिए वायुसेना ने एक व्यापक हवाई अभियान चलाया है। यह ऑपरेशन केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिमालय के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र को विनाश से बचाने की एक बड़ी जंग बन गया है।
यह बचाव अभियान सामान्य धरातलीय अभियानों से बिल्कुल अलग और अधिक जोखिम भरा रहा। वायुसेना ने लगभग 9,500 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। इतनी ऊंचाई पर हिमालय की हवा अत्यंत विरल हो जाती है, जिससे हेलीकॉप्टरों के इंजनों की कार्यक्षमता और पायलटों के संतुलन पर गहरा दबाव पड़ता है। इस चुनौतीपूर्ण वातावरण में वायुसेना ने अपने सबसे भरोसेमंद और शक्तिशाली एमआई-17वी5 हेलीकॉप्टरों को तैनात किया। इन हेलीकॉप्टरों ने बंबी बकेट तकनीक का उपयोग करते हुए प्रभावित क्षेत्रों में कम से कम 12,000 लीटर पानी का छिड़काव किया।
इस दावानल की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह आग केवल लोहित घाटी तक सीमित नहीं रही। शुष्क मौसम और तेज हवाओं के कारण आग की लपटें धीरे-धीरे पड़ोसी राज्य मणिपुर के जंगलों की ओर बढ़ रही हैं। यदि इसे समय रहते पूरी तरह काबू नहीं किया गया, तो यह एक अंतर-राज्यीय पर्यावरणीय संकट का रूप ले सकती है। मणिपुर की सीमा की ओर बढ़ती इस आग ने सुरक्षा एजेंसियों और वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे जैव-विविधता और कई दुर्लभ प्रजातियों के आवास को गंभीर खतरा है।
भारतीय वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर इस मिशन की सफलता की जानकारी साझा की। वायुसेना ने बताया कि दुर्गम पहाड़ियों और धुएं के गुबार के बीच हेलीकॉप्टर उड़ाना पायलटों की सटीकता और कौशल की कठिन परीक्षा थी। यह ऑपरेशन भारतीय वायुसेना की न केवल युद्ध कौशल, बल्कि नागरिक सहायता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है। वर्तमान में, वायुसेना की टीमें और स्थानीय प्रशासन आग की स्थिति पर निरंतर नजर रख रहे हैं ताकि मणिपुर की ओर इसके प्रसार को पूरी तरह रोका जा सके।