Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Rahul Gandhi Meets Vedant: सीबीएसई (CBSE) की गड़बड़ी पर आवाज उठाने वाले छात्र से मिले राहुल गांधी; ट... Shalimar Bagh Demolition: दिल्ली के हैदरपुर में अवैध अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर; रोड नंबर-32... Pune Spurious Liquor Tragedy: जहरीली शराब कांड में मौतों का आंकड़ा 24 पहुँचा; 21 अधिकारी निलंबित, सर... Kedarnath Update: ऑरेंज अलर्ट के बीच प्रशासन का बड़ा फैसला; मौसम सामान्य होने तक स्थगित हुई केदारनाथ... Uttar Pradesh New DGP: यूपी को मिला नया स्थायी DGP; IPS राजीव कृष्ण बने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक Cyber Fraud in Datia: मां पीतांबरा पीठ के नाम पर ऑनलाइन ठगी; 'मिर्ची हवन' का झांसा देकर लाखों की धोख... Banswara Crime News: तेजपुर गांव में विवाहिता पर सिरफिरे युवक का जानलेवा हमला; ब्लेड से किए वार, हाल... Delhi Building Collapse: साकेत मेट्रो स्टेशन के पास गिरी बिल्डिंग; मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने लिया ज... Himachal Pradesh Road Accident: पांगी में पर्यटकों की कार दुर्घटनाग्रस्त; 8 लोगों की जान गई, रेस्क्य... Indore Pipeline Burst: महू में नर्मदा जल प्रदाय योजना की पाइपलाइन फटी; 150 फीट ऊपर उठा पानी का फव्वा...

भारत में बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर लग सकती है रोक

बच्चों पर पड़ते कुप्रभाव का असर समझ में आ गया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: डेनमार्क, ऑस्ट्रेलिया और फ्रांस जैसे देशों के नक्शेकदम पर चलते हुए अब भारत भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग को प्रतिबंधित करने की तैयारी कर रहा है। गुरुवार को संसद में सरकार द्वारा प्रस्तुत एक सर्वेक्षण-रिपोर्ट में संकेत दिया गया कि नाबालिगों के बीच बढ़ती ऑनलाइन लत को कम करने के लिए कड़े नियामक उपाय किए जा सकते हैं।

संसदीय रिपोर्ट में बच्चों के मानसिक और शारीरिक विकास को प्राथमिकता देते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट में ऑनलाइन कक्षाओं के बोझ को कम करने का सुझाव दिया गया है। साथ ही, ऑनलाइन क्लास शुरू करने के लिए एक न्यूनतम आयु निर्धारित करने की बात कही गई है ताकि छोटे बच्चे स्क्रीन से दूर रह सकें।

शिक्षण के लिए केवल डिजिटल माध्यमों पर निर्भर रहने के बजाय सरल और पारंपरिक शिक्षण सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा देने का परामर्श दिया गया है। यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है कि माता-पिता के मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट बच्चों के लिए आसानी से उपलब्ध न हों। इसके लिए अभिभावकों के लिए विशेष कार्यशालाएं आयोजित करने का भी प्रस्ताव है।

स्क्रीनिंग टाइम और विज्ञापन: बच्चों के लिए एक निश्चित स्क्रीन टाइम तय करने और उन्हें ऑनलाइन जुए व अनुपयुक्त विज्ञापनों से बचाने के लिए सख्त चेतावनी दी गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन लत कम होने से बच्चों में बढ़ रही हिंसा और अश्लीलता जैसे व्यवहारिक विकारों को रोका जा सकता है। स्कूलों से आग्रह किया गया है कि वे बच्चों को आभासी दुनिया और वास्तविकता के बीच संतुलन बनाने की शिक्षा दें और उन्हें बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें।