भवन निर्माण की तकनीक में भी पर्यावरण पर ध्यान
-
नये पदार्थ का नाम ईएसएम रखा है
-
कार्बन उत्सर्जन में भारी कटौती होगी
-
भवन निर्माण की तकनीक बदलेगी
राष्ट्रीय खबर
रांचीः निर्माण जगत में एक युगांतरकारी बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। वॉर्सेस्टर पॉलिटेक्निक इंस्टीट्यूट के शोधकर्ताओं ने एक ऐसा अनूठा निर्माण मटेरियल विकसित किया है, जो अपने उत्पादन के दौरान उत्सर्जित होने वाली कार्बन गैस की तुलना में कहीं अधिक कार्बन वातावरण से सोख लेता है।
यह शोध एक ऐसे भविष्य की ओर इशारा करता है जहाँ हमारी इमारतें प्रदूषण का कारण बनने के बजाय उसे कम करने का जरिया बनेंगी। इस नए पदार्थ को एंजाइमेटिक स्ट्रक्चरल मटेरियल (ईएसएम) नाम दिया गया है। इसे विशेष रूप से मजबूत, टिकाऊ और पुनर्चक्रण योग्य बनाया गया है। पारंपरिक निर्माण सामग्री (जैसे कंक्रीट) के विपरीत, इसके निर्माण में नगण्य ऊर्जा की खपत होती है।
देखें इससे संबंधित वीडियो
डब्ल्यूपीआई के सिविल, एनवायरनमेंटल और आर्किटेक्चरल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख, प्रोफेसर नीमा रहबर के नेतृत्व में इस परियोजना को अंजाम दिया गया। उनकी टीम ने एक विशेष एंजाइम का उपयोग किया जो कार्बन डाइऑक्साइड को ठोस खनिज कणों में बदलने में मदद करता है। इन कणों को आपस में जोड़कर सामान्य तापमान पर तैयार किया जाता है, जिससे यह कुछ ही घंटों में ढांचागत घटकों का रूप ले लेता है। यह पारंपरिक कंक्रीट से काफी अलग है, जिसे उच्च तापमान पर बनाया जाता है और पूरी तरह पकने में हफ्तों का समय लेता है।
प्रोफेसर रहबर के अनुसार, कंक्रीट दुनिया में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्री है और वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में इसकी हिस्सेदारी लगभग 8 प्रतिशत है। ईएसएम न केवल उत्सर्जन कम करता है, बल्कि यह कार्बन को कैप्चर भी करता है। आंकड़े बताते हैं कि जहां एक घन मीटर पारंपरिक कंक्रीट 330 किलोग्राम सीओ 2 उत्सर्जित करता है, वहीं एक घन मीटर ईएसएम वातावरण से 6 किलोग्राम से अधिक सीओ 2 को सोखकर उसे पत्थर (खनिज) के रूप में संचित कर लेता है।
ईएसएम को वास्तविक दुनिया की जरूरतों के अनुसार ढाला गया है। इसकी मजबूती को जरूरत के हिसाब से बदला जा सकता है और इसे आसानी से रिपेयर भी किया जा सकता है, जिससे कचरा कम होता है। यह रूफ डेक, वॉल पैनल और मॉड्यूलर बिल्डिंग सिस्टम के लिए आदर्श है। इसके अलावा, यह तकनीक किफायती आवास, आपदा प्रबंधन और जलवायु-अनुकूल बुनियादी ढांचे के निर्माण में मील का पत्थर साबित हो सकती है। यदि वैश्विक निर्माण क्षेत्र का एक छोटा हिस्सा भी ईएसएम जैसे कार्बन-नेगेटिव मटेरियल को अपनाता है, तो पृथ्वी के बढ़ते तापमान को रोकने में यह एक बड़ी जीत होगी।
#निर्माणक्रांति #पर्यावरणसुरक्षा #कार्बननेटिव #ग्रीनबिल्डिंग #नईतकनीक #GreenConstruction #CarbonCapture #SustainableBuilding #WPIResearch #EcoFriendlyInnovation