डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के बाद फ्रांस के राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया
पेरिस: फ्रांस की राजधानी पेरिस में बुधवार को आयोजित एक विशेष शिखर सम्मेलन ने वैश्विक राजनीति में एक नया तनाव पैदा कर दिया है। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ग्रीनलैंड के मुद्दे पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ जारी गतिरोध को पूरे यूरोप के लिए एक चेतावनी की घंटी करार दिया है। मैक्रों ने डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिकसेन और ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेन्स-फ्रेडरिक नील्सन की मेजबानी करते हुए स्पष्ट किया कि अब यूरोप को अपनी सीमाओं और संसाधनों की रक्षा के लिए किसी बाहरी शक्ति पर निर्भर रहने के बजाय आत्मनिर्भर होना होगा।
यह कूटनीतिक विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और खनिज संपदा से भरपूर ग्रीनलैंड को हथियाने या खरीदने की इच्छा जताई। अमेरिका ग्रीनलैंड को उत्तरी अटलांटिक में अपनी सुरक्षा के लिए एक अनिवार्य आधार मानता है। हालांकि, डेनमार्क और ग्रीनलैंड की सरकारों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे अतार्किक और अपमानजनक बताया है। मैक्रों ने इस अमेरिकी रुख को यूरोपीय क्षेत्रीय अखंडता पर एक चुनौती के रूप में पेश किया है।
उन्होंने कहा कि यूरोप के क्षेत्र बिक्री के लिए नहीं हैं और महाद्वीप के भविष्य का फैसला ब्रसेल्स और कोपेनहेगन में होना चाहिए, न कि वाशिंगटन में। ग्रीनलैंड में दुर्लभ पृथ्वी धातुओं का विशाल भंडार है, जो भविष्य की तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए आवश्यक है। मैक्रों चाहते हैं कि इन संसाधनों पर यूरोप का नियंत्रण रहे ताकि चीन या अमेरिका पर निर्भरता कम हो सके। आर्कटिक क्षेत्र तेजी से सैन्यीकरण की ओर बढ़ रहा है। मैक्रों ने चेतावनी दी कि बाहरी हस्तक्षेप और दुष्प्रचार के माध्यम से क्षेत्र की स्थिरता को भंग करने की कोशिश की जा रही है।
ग्रीनलैंड केवल राजनीति का केंद्र नहीं है, बल्कि यह जलवायु परिवर्तन के खिलाफ वैश्विक लड़ाई का सबसे संवेदनशील मोर्चा भी है। मैक्रों ने कहा कि ग्रीनलैंड की बर्फ का पिघलना पूरी दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने ट्रंप प्रशासन की पर्यावरण नीतियों की परोक्ष आलोचना करते हुए कहा कि आर्कटिक को सिर्फ एक रियल एस्टेट डील के रूप में देखना विनाशकारी होगा। उन्होंने तर्क दिया कि ग्रीनलैंड की रक्षा करना वास्तव में ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ लड़ाई को मजबूत करना है।
यह शिखर सम्मेलन पेरिस और वाशिंगटन के बीच बढ़ते वैचारिक अंतर को दर्शाता है। मैक्रों लंबे समय से यूरोपीय रणनीतिक स्वायत्तता के पैरोकार रहे हैं। ग्रीनलैंड विवाद ने उन्हें यूरोपीय देशों को एकजुट करने का एक बड़ा अवसर दे दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूरोप को अपनी स्वतंत्र आर्कटिक नीति विकसित करनी होगी और अपनी रक्षा क्षमताओं को इस स्तर तक ले जाना होगा कि उसे किसी भी खतरे के लिए केवल अमेरिका के भरोसे न रहना पड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एक द्वीप के बारे में नहीं है, बल्कि यह २१वीं सदी की उस नई विश्व व्यवस्था का संकेत है जहाँ यूरोप अपनी स्वतंत्र पहचान और शक्ति के साथ खड़ा होना चाहता है।