Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Lok Sabha Update: भारी हंगामे के कारण पीएम मोदी का संबोधन रद्द, 8 सांसदों के निलंबन और नरवणे की किता... Kishtwar Encounter: किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़, एक आतंकी ढेर; ऑपरेशन अभ... MP Politics: 'ब्राह्मण समाज सबकी आंखों में खटक रहा है...', बीजेपी विधायक गोपाल भार्गव के बयान से मध्... Rajya Sabha Update: लोकसभा के बाद अब राज्यसभा में टकराव के आसार! PM मोदी के भाषण से पहले कांग्रेस ने... Pune-Mumbai Expressway: पुणे एक्सप्रेस-वे पर 24 घंटे से लगा महाजाम, हजारों गाड़ियां फंसी; सीएम फडणवी... बृहस्पति के बादलों के पीछे छिपा है एक विशाल रहस्य बड़े नेताओं की अग्निपरीक्षा का दौर अब चालू हो गया सत्तारूढ़ मुख्यमंत्री के तौर पर ममता बनर्जी का नया रिकार्ड जनरल नरवणे की चर्चा कर राहुल ने फिर घेरा भारत और अमेरिका व्यापार समझौते पर जानकारी पर बवाल

मंगल ग्रह पर मिले अजीब सफेद पत्थर

नासा के यान की मदद से प्राचीन बारिश का संकेत मिला है

  • परसेवररेंस रोवर ने भेजी थी जानकारी

  • लाखों साल की बारिश से ऐसा होता है

  • पत्थरों को काओलिनाइट कहा जाता है

राष्ट्रीय खबर

रांचीः मंगल ग्रह की लाल और धूल भरी सतह पर बिखरे हुए छोटे, हल्के रंग के पत्थर वैज्ञानिकों को एक बेहद रोमांचक कहानी सुना रहे हैं। नासा के परसेवरेंस रोवर द्वारा खोजे गए ये सफेद धब्बे इस बात के पुख्ता सबूत दे रहे हैं कि किसी ज़माने में मंगल ग्रह आज की तुलना में कहीं अधिक गीला और रहने योग्य रहा होगा। ये पत्थर इस ओर इशारा करते हैं कि मंगल के कुछ क्षेत्रों में कभी पृथ्वी के उष्णकटिबंधीय इलाकों जैसा नम वातावरण था, जहाँ लाखों वर्षों तक लगातार बारिश होती रही होगी।

देखें इससे संबंधित पुराना वीडियो

परसेवरेंस रोवर ने इन पत्थरों की पहचान काओलिनाइट क्ले के रूप में की है। यह एल्युमीनियम से भरपूर एक सफेद पदार्थ है। पृथ्वी पर काओलिनाइट का निर्माण केवल तभी होता है जब चट्टानें और तलछट लंबे समय तक पानी के संपर्क में रहती हैं, जिससे उनमें मौजूद अन्य खनिज धुल जाते हैं। इस भूगर्भीय प्रक्रिया के लिए गर्म और गीले जलवायु में लाखों वर्षों की निरंतर वर्षा की आवश्यकता होती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, मंगल पर इस तरह की चट्टानें शायद सबसे महत्वपूर्ण खोज हैं, क्योंकि इनका निर्माण होना बहुत कठिन है। इसके लिए इतने अधिक पानी की आवश्यकता होती है कि यह मंगल के प्राचीन काल में गर्म और गीले होने का अकाट्य प्रमाण बन जाता है। शोधकर्ता ब्रोज़ ने बताया कि पृथ्वी पर काओलिनाइट आमतौर पर वर्षावनों में पाया जाता है, जहाँ भारी बारिश के कारण तीव्र रासायनिक अपक्षय होता है। मंगल जैसे बंजर और ठंडे ग्रह पर इसकी उपस्थिति प्राचीन जल चक्र की पुष्टि करती है।

जेज़ेरो क्रेटर में पाए गए ये टुकड़े छोटे कंकड़ से लेकर बड़े पत्थरों तक के आकार के हैं। हालांकि ये देखने में मामूली लग सकते हैं, लेकिन इन्होंने मंगल के इतिहास को लेकर चल रही बहसों को एक नई दिशा दी है। वैज्ञानिक अभी भी इस रहस्य को सुलझाने में जुटे हैं कि ये पत्थर आखिर आए कहाँ से? होर्गन का मानना है कि शायद ये नदियाँ इन्हें बहाकर जेज़ेरो झील में ले आईं या फिर किसी उल्कापिंड के टकराने से ये यहाँ बिखर गए।

इन नमूनों की तुलना कैलिफोर्निया और दक्षिण अफ्रीका में पाए जाने वाले पत्थरों से की गई, जहाँ रासायनिक संरचना बिल्कुल समान पाई गई। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि काओलिनाइट का रासायनिक पैटर्न हाइड्रोथर्मल (गर्म भूमिगत पानी) के बजाय वर्षा के संकेतों के अधिक करीब है। पानी जीवन का आधार है, और यदि मंगल पर वर्षा आधारित वातावरण था, तो यह जीवन के पनपने के लिए एक आदर्श स्थान रहा होगा।

#MarsDiscovery #NASA #PerseveranceRover #SpaceNews #RedPlanet #Astrobiology #MarsRain #Geology #ScientificDiscovery #ExtraterrestrialLife #मंगल_ग्रह #नासा #परसेवरेंस_रोवर #अंतरिक्ष_विज्ञान #ब्रह्मांड #विज्ञान_समाचार #मंगल_पर_बारिश #खगोल_विज्ञान #ताजा_खबर #स्पेस_न्यूज़