तेलंगाना में फोन टैपिंग मामले की जांच आगे बढ़ी
राष्ट्रीय खबर
हैदराबादः तेलंगाना में फोन टैपिंग मामले को लेकर भारत राष्ट्र समिति के नेतृत्व और सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के बीच राजनीतिक टकराव अपने चरम पर है। हालिया घटनाक्रमों से यह स्पष्ट 23 जनवरी 2026 को बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव से विशेष जांच टीम ने जुबली हिल्स पुलिस स्टेशन में लगभग 8 घंटे तक पूछताछ की।
इससे पहले 20 जनवरी को पूर्व मंत्री टी. हरीश राव से भी घंटों पूछताछ की जा चुकी है। एसआईटी का आरोप है कि बीआरएस सरकार के दौरान विशेष खुफिया ब्यूरो ने हजारों नागरिकों, जिनमें राजनेता, न्यायाधीश, पत्रकार और व्यापारी शामिल थे, के फोन अवैध रूप से टैप किए थे। जांच में वित्तीय पहलुओं और कथित जबरन वसूली के कोणों की भी जांच की जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि एसआईटी ने टी. हरीश राव को एक गवाह और पीड़ित दोनों के रूप में पेश किया। अधिकारियों ने उन्हें सबूत दिखाए कि उनके और उनके परिवार के फोन भी टैप किए गए थे, जिससे वे काफी हैरान रह गए। बीआरएस नेतृत्व ने आधिकारिक तौर पर घबराहट के दावों को खारिज किया है और इसे कांग्रेस की प्रतिशोध की राजनीति करार दिया है:
केटीआर ने एसआईटी की जांच को टाइम-पास एक्सरसाइज और डेली टीवी सीरियल बताया है। उनका आरोप है कि कांग्रेस सरकार अपनी प्रशासनिक विफलताओं और चुनावी वादों को पूरा न कर पाने से जनता का ध्यान भटकाने के लिए यह नाटक कर रही है।
बीआरएस का कहना है कि खुफिया एजेंसियां कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए निगरानी करती हैं, जो नेहरू से लेकर मोदी तक हर सरकार के तहत होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर जांच निष्पक्ष है, तो तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और वर्तमान डीजीपी से पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है? केटीआर ने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों से मीडिया में जानबूझकर लीक दी जा रही हैं ताकि उनके और उनके परिवार का चरित्र हनन किया जा सके। उन्होंने इसे कांग्रेस का सस्ती लोकप्रियता हासिल करने का तरीका बताया।
कांग्रेस और भाजपा दोनों ही बीआरएस पर हमलावर हैं। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि बीआरएस नेतृत्व की संलिप्तता के सबूत स्पष्ट हैं और आने वाले दिनों में बड़े चेहरे जेल जा सकते हैं। दूसरी ओर, बीआरएस कार्यकर्ताओं ने गिरफ्तारी की आशंका के बीच विरोध प्रदर्शन भी किए हैं, जिससे राज्य में तनाव का माहौल बना हुआ है।