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मलेरिया नियंत्रण की दिशा में इस खोज की बहुत मदद मिलेगी

एक प्रोटीन जिसके बिना जीवित नहीं रह सकता परजीवी

  • एआरके 1 नामक अणु पर केंद्रित

  • बहु केंद्रीय अनुसंधान था यह भी

  • नई दवा बनाने की दिशा में फायदा

राष्ट्रीय खबर

रांचीः अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के शोधकर्ताओं ने मलेरिया के परजीवी के पनपने और फैलने के तरीके को लेकर नए रहस्यों का खुलासा किया है। उनके हालिया अध्ययन में एक विशेष प्रोटीन की पहचान की गई है, जो परजीवी के जीवित रहने और एक मेजबान से दूसरे मेजबान तक पहुँचने के लिए अनिवार्य है।

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यह खोज भविष्य में मलेरिया-रोधी दवाओं के विकास के लिए एक बेहद आशाजनक लक्ष्य साबित हो सकती है। यह खोज ऑरोरा-रिलेटेड काइनेज 1 (एआरके1) नामक अणु पर केंद्रित है। नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस अध्ययन में नॉटिंघम विश्वविद्यालय, भारत के राष्ट्रीय प्रतिरक्षा विज्ञान संस्थान (एनआईआई), नीदरलैंड के ग्रोनिंगन विश्वविद्यालय और फ्रांसिस क्रिक इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने पाया कि एआरके1 परजीवी की वृद्धि और विभाजन की असामान्य प्रक्रिया के दौरान एक सेलुलर ट्रैफिक कंट्रोलर की तरह काम करता है।

मलेरिया दुनिया की सबसे घातक संक्रामक बीमारियों में से एक बनी हुई है। यह प्लाज्मोडियम परजीवियों के कारण होता है, जो मानव शरीर और मच्छरों दोनों के भीतर तेजी से संख्या बढ़ाते हैं। बीमारी को रोकने के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है कि ये परजीवी कैसे विभाजित और पुनरुत्पादित होते हैं।

मलेरिया का परजीवी मानवीय कोशिकाओं की तुलना में बहुत अलग तरीके से विभाजित होता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि एआरके 1 स्पिंडल (एक कोशिकीय संरचना जो आनुवंशिक सामग्री को अलग करती है) को व्यवस्थित करने में केंद्रीय भूमिका निभाता है। यदि इसे निष्क्रिय कर दिया जाए, तो परजीवी का विकास तुरंत रुक जाता है। प्रयोगशाला परीक्षणों में देखा गया कि इस प्रोटीन के बिना परजीवी सही ढंग से विभाजित नहीं हो पाए और उनका जीवन चक्र बाधित हो गया।

नॉटिंघम विश्वविद्यालय के डॉ. र्युजी यानासे ने कहा, ऑरोरा नाम भोर की रोमन देवी के नाम पर है, और हमें विश्वास है कि यह प्रोटीन मलेरिया कोशिका जीव विज्ञान की हमारी समझ में एक नई सुबह का प्रतीक है।

नई दिल्ली स्थित ब्रिक्स एन आई आई की अन्नू नागर और डॉ. पुष्कर शर्मा ने बताया कि यह एक सामूहिक प्रयास था जिसने हमें मानव और मच्छर दोनों मेजबानों में एआरके 1 की भूमिका को समझने में मदद की। वैज्ञानिकों के लिए सबसे उत्साहजनक बात यह है कि परजीवी का एआरके 1 सिस्टम मानवीय कोशिकाओं में पाए जाने वाले समान प्रोटीन से काफी अलग है।

प्रोफेसर तिवारी ने जोर देकर कहा, यह अंतर एक बड़ा लाभ है। इसका मतलब है कि हम ऐसी दवाएं तैयार कर सकते हैं जो विशेष रूप से परजीवी के एआरके 1 को लक्षित करें, जिससे रोगी को नुकसान पहुँचाए बिना मलेरिया को खत्म किया जा सके।

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