दूसरे संगठनों के बाद अब डब्ल्यूएचओ का भी नंबर आया
वाशिंगटनः संयुक्त राज्य अमेरिका आधिकारिक तौर पर विश्व स्वास्थ्य संगठन से अलग हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के पहले ही दिन, 20 जनवरी 2025 को एक कार्यकारी आदेश के माध्यम से इस प्रक्रिया को फिर से शुरू किया था, जो एक साल की अनिवार्य नोटिस अवधि पूरी होने के बाद अब प्रभावी हो गया है।
यह वैश्विक स्वास्थ्य कूटनीति के इतिहास में एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि अमेरिका 1948 में इसके गठन के समय से ही इस संगठन का संस्थापक सदस्य और सबसे बड़ा वित्तपोषक रहा है। ट्रंप प्रशासन ने इस अलगाव के पीछे कई महत्वपूर्ण कारण बताए हैं। अमेरिकी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग के अनुसार, संगठन ने महामारी की शुरुआत में चीन के प्रति नरम रुख अपनाया और समय पर सटीक जानकारी साझा करने में विफल रहा।
अमेरिका का आरोप है कि संगठन ने राजनीतिक प्रभाव से मुक्त होने और अपनी नौकरशाही में सुधार करने के बार-बार दिए गए सुझावों को नजरअंदाज किया। प्रशासन का तर्क है कि संगठन चीन के अनुचित राजनीतिक प्रभाव में कार्य कर रहा है, जिससे अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचा है।
अमेरिका ऐतिहासिक रूप से डब्ल्यूएचओ के कुल बजट का लगभग 15 से 20 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करता रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के हटने से संगठन के वित्तीय ढांचे पर गहरा असर पड़ेगा। जिनेवा स्थित मुख्यालय के बाहर से अमेरिकी झंडा हटा दिया गया है, हालांकि एक विवाद अभी भी बना हुआ है।
संगठन के नियमों के अनुसार, किसी भी देश की वापसी तभी पूर्ण मानी जाती है जब वह अपने सभी बकाया देयकों का भुगतान कर दे। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका पर लगभग 278 मिलियन डॉलर का बकाया है, जिसे चुकाने से अमेरिकी विदेश विभाग ने इनकार कर दिया है।
इस निर्णय से ‘ग्लोबल इन्फ्लुएंजा सर्विलांस एंड रिस्पांस सिस्टम’ जैसे महत्वपूर्ण डेटा-शेयरिंग प्लेटफॉर्म प्रभावित हो सकते हैं। अमेरिका ने अब बहुपक्षीय संगठनों के बजाय अन्य देशों के साथ सीधे द्विपक्षीय समझौतों के माध्यम से सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यों को आगे बढ़ाने की घोषणा की है।
स्वास्थ्य सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक संयुक्त बयान में कहा कि अमेरिका अब अमेरिका फर्स्ट की नीति के तहत अपने संसाधनों का उपयोग सीधे स्वास्थ्य नवाचार और आपातकालीन प्रतिक्रिया के लिए करेगा। दूसरी ओर, इस शून्य को भरने के लिए चीन और अन्य देश आगे आ रहे हैं, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य नीतियों की दिशा बदलने की संभावना है। कैलिफोर्निया जैसे कुछ अमेरिकी राज्यों ने स्वतंत्र रूप से डब्ल्यूएचओ के नेटवर्क के साथ जुड़े रहने की इच्छा जताई है।