भारतीय रुपया ने अवमूल्यन का छहमाही रिकार्ड बना दिया
-
विदेशी बिकवाली से दबाव कायम है
-
ट्रंप की टैरिफ का प्रभाव भी दिख रहा
-
आरबीआई ने किसी तरह थाम रखा है
राष्ट्रीय खबर
मुंबई: भारतीय रुपया शुक्रवार को डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक गिरावट दर्ज करते हुए 92.00 के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया। विदेशी पूंजी की लगातार निकासी और आयातकों द्वारा डॉलर की भारी मांग (हेजिंग) के कारण रुपया 91.9650 के सर्वकालिक निचले स्तर पर फिसल गया। यह पिछले छह महीनों में रुपये की सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट है।
कारोबार के अंत में रुपया 91.94 के स्तर पर बंद हुआ, जो पिछले दिन की तुलना में 0.34फीसद की गिरावट दर्शाता है। इस गिरावट के साथ ही रुपये ने इस सप्ताह कुल 1.18फीसद और इस पूरे महीने में अब तक 2.3फीसद की कमजोरी दर्ज की है।
रुपये का यह प्रदर्शन अन्य एशियाई मुद्राओं की तुलना में काफी खराब रहा, क्योंकि इस सप्ताह अधिकांश एशियाई मुद्राओं ने अमेरिकी डॉलर सूचकांक में कमजोरी के बावजूद मामूली बढ़त हासिल की थी। वैश्विक स्तर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दी गई धमकियों और फिर उनके नरम रुख के बावजूद भारतीय मुद्रा पर दबाव कम नहीं हुआ।
पूरे सप्ताह और महीने के दौरान रुपये पर दबाव लगातार बढ़ता रहा। विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी बाजार से अपना निवेश निकालना जारी रखा, जबकि कॉर्पोरेट घरानों और आयातकों ने रुपये में और गिरावट की आशंका के चलते डॉलर की अग्रिम खरीदारी (हेजिंग) तेज कर दी। दूसरी ओर, निर्यातकों ने वायदा बाजार में डॉलर की बिक्री कम कर दी, जिससे बाजार में डॉलर की आपूर्ति कम हो गई और स्थानीय मुद्रा पर दबाव और गहरा गया।
भारतीय रिजर्व बैंक इस गिरावट को थामने के लिए नियमित रूप से हस्तक्षेप कर रहा है। हालांकि, केंद्रीय बैंक के प्रयासों से गिरावट की गति तो धीमी हुई है, लेकिन वे इसके गिरते रुझान को पूरी तरह बदलने में सफल नहीं रहे हैं। बैंकिंग सूत्रों के अनुसार, आरबीआई ने इस सप्ताह कम से कम दो बड़े मौकों पर बाजार में हस्तक्षेप किया, जिसमें स्पॉट मार्केट में डॉलर की बिक्री और तरलता प्रबंधन के लिए बाय सेल स्वैप शामिल रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी फंडों की निकासी नहीं रुकती, रुपये पर यह दबाव जारी रह सकता है।