भारत के पानी रोकने से भीषण जल संकट
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पहलगाम आतंकी हमले के बाद कार्रवाई
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साफ कहा गया खून और पानी साथ नहीं
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कनाडा के मंच पर अपना दुखड़ा सुनाया
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: सिंधु जल संधि को निलंबित करने के भारत के फैसले पर अडिग रहने के बाद पाकिस्तान की चिंताएं गहरा गई हैं। इस्लामाबाद ने आधिकारिक तौर पर कहा है कि भारत के इस कदम ने उसकी जल सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व संकट पैदा कर दिया है और यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी जोखिम भरा है।
कनाडा द्वारा आयोजित ग्लोबल वॉटर बैंकरप्सी पॉलिसी राउंडटेबल को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि उस्मान जदून ने भारत के निर्णय को पानी का हथियार बनाना करार दिया। जदून ने दावा किया कि नई दिल्ली की कार्रवाई 1960 की उस ऐतिहासिक संधि का उल्लंघन है, जिसे विश्व बैंक की मध्यस्थता में किया गया था। उन्होंने भारत पर संधि के कई उल्लंघनों का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे निचले बहाव वाले क्षेत्रों में पानी के प्रवाह में अघोषित व्यवधान आया है और महत्वपूर्ण हाइड्रोलॉजिकल डेटा (जल विज्ञान संबंधी डेटा) को रोका गया है।
पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने यह कठोर कदम उठाया था। यह हमला लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े एक संगठन द्वारा किया गया था। 23 अप्रैल, 2025 से भारत ने संधि को स्थगित कर दिया। इसके तहत भारत ने सामान्य रूप से साझा किए जाने वाले बाढ़ चेतावनी संदेशों को भेजना बंद कर दिया है। साथ ही, खरीफ और रबी सीजन के लिए पश्चिमी नदियों के सिंचाई आंकड़ों को साझा करना भी रोक दिया गया है।
भारत का यह निर्णय सीमा पार आतंकवाद से निपटने के उसके नए सिद्धांत का हिस्सा है। 12 मई को ऑपरेशन सिंदूर के बाद अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक पड़ोसी देश अपनी धरती पर छिपे आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता, तब तक सिंधु जल संधि पर कोई बातचीत नहीं होगी। उन्होंने अपने कड़े रुख को दोहराते हुए कहा कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।
पाकिस्तानी राजदूत ने जोर देकर कहा कि सिंधु बेसिन पाकिस्तान की कृषि जल आवश्यकताओं का 80 फीसद से अधिक हिस्सा प्रदान करता है और 24 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका का समर्थन करता है। पानी के भंडारण की अक्षमता और भारत के इस कड़े कदम ने पाकिस्तान की जल असुरक्षा को जगजाहिर कर दिया है। पाकिस्तान वर्तमान में ग्लेशियरों के पिघलने, भूजल की कमी और बढ़ती जनसंख्या के दबाव से जूझ रहा है, ऐसे में भारत के इस रुख ने उसकी आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था पर भारी दबाव डाल दिया है।