Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Hyderabad Fire Tragedy: हैदराबाद फर्नीचर शोरूम में भीषण आग, बेसमेंट में जिंदा जले 5 लोग, 22 घंटे बाद... अकील अख्तर ने थामा पतंग का साथ! झारखंड में AIMIM का बड़ा दांव, पाकुड़ की राजनीति में मचेगी हलचल मिर्जापुर जिम धर्मांतरण मामला: कोर्ट ने आरोपी इमरान को भेजा जेल, 14 दिन की जुडिशियल रिमांड पर फैसला Singrauli Mine Collapse: सिंगरौली में बड़ा हादसा, मिट्टी की खदान धंसने से 3 लोगों की मौत, 2 की हालत ... MBMC Election Results 2026: मीरा भयंदर में बीजेपी का दबदबा, लेकिन मेयर की कुर्सी के लिए विपक्षी एकजु... देश की नौकरशाही पर लगाम कसने की नई चाल Suicide Case: पिता ने टोकना तो नाराज हुआ बेटा, ऑटो के अंदर फंदा लगाकर दी जान; परिजनों का रो-रोकर बुर... शंकराचार्य मुद्दे पर योगी और केशव मौर्य की तल्खी Gwalior Crime: ग्वालियर में 'लुटेरी दुल्हन' गैंग का भंडाफोड़, शादी के नाम पर ठगने वाली दुल्हन समेत 7... तेजस्वी यादव राजद के कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त

एसआईआर न्याय के अनुरुप होना चाहिएः सीजेआई

निरंतर विवाद और आरोपों के  बाद पश्चिम बंगाल पर नजर

  • टीएमसी ने लगाये हैं गंभीर आरोप

  • चुनाव आयोग ने कई सबूत पेश किये

  • बीस फीसद आबादी को नोटिस जारी हुआ

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि मतदाता सूची के संशोधन की प्रक्रिया प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह पूरी प्रक्रिया न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि किसी भी नागरिक के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन न हो।

उच्चतम न्यायालय उन याचिकाओं पर सुनवाई फिर से शुरू कर रहा था, जो तृणमूल कांग्रेस के नेताओं द्वारा दायर की गई थीं। इन याचिकाओं में पश्चिम बंगाल में चल रहे विशेष गहन संशोधन की प्रक्रिया में गंभीर विसंगतियों का आरोप लगाया गया है। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से बाहर किए जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर उनके मताधिकार पर प्रहार है।

चुनाव आयोग का चौंकाने वाला हलफनामा सुनवाई से ठीक पहले, चुनाव आयोग ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया, जिसमें पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची में पाई गई तार्किक विसंगतियों का विवरण दिया गया। आयोग ने कहा कि कुछ आंकड़े तो विज्ञान को भी चुनौती देते नजर आ रहे हैं।

हलफनामे में प्रस्तुत कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं। दो ऐसे मतदाता पाए गए जिनके 200 से अधिक बच्चे दर्ज हैं। सात मतदाता ऐसे मिले जिनके 100 से अधिक बच्चे हैं। 10 मतदाताओं के 50 से अधिक और अन्य 10 के 40 से अधिक बच्चे दर्ज पाए गए हैं। चुनाव आयोग का तर्क है कि इन्हीं विसंगतियों को दूर करने के लिए विशेष गहन संशोधन अनिवार्य हो गया था।

इससे पहले सोमवार को हुई सुनवाई में, अदालत ने चुनाव आयोग की इस कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की थी। न्यायालय ने कहा कि चल रही एसआईआर प्रक्रिया के कारण पश्चिम बंगाल के आम नागरिकों को अत्यधिक तनाव और दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

आंकड़ों के अनुसार, राज्य की लगभग 20 फीसद जनसंख्या यानी करीब 1.36 करोड़ लोगों को चुनाव आयोग द्वारा नोटिस जारी किए गए हैं। इन लोगों से उनके नाम, पारिवारिक पृष्ठभूमि और अन्य विवरणों में पाई गई तार्किक विसंगतियों पर स्पष्टीकरण मांगा गया है। अदालत ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को नोटिस देना प्रशासनिक मशीनरी की विफलता या प्रक्रियात्मक त्रुटि हो सकती है, जिसका खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

प्राकृतिक न्याय और निष्पक्षता की आवश्यकता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी इस संदर्भ में अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची किसी भी लोकतंत्र का आधार होती है। यदि संशोधन की प्रक्रिया में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया जाता—अर्थात यदि प्रभावित व्यक्ति को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं मिलता या प्रक्रिया भेदभावपूर्ण होती है—तो यह चुनावी प्रक्रिया की शुचिता को प्रभावित कर सकता है।