वोटर लिस्ट से नाम काटने की साजिश
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः पश्चिम बंगाल की राजनीति में वोटर लिस्ट से नाम हटाने के मुद्दे ने एक नया मोड़ ले लिया है। पूर्वी मेदिनीपुर जिले के तमलुक में फर्जी जानकारी के आधार पर सैकड़ों मतदाताओं के नाम कटवाने की साजिश रचने के आरोप में पुलिस ने एक भाजपा नेता को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार नेता की पहचान अमित मंडल के रूप में हुई है, जो तमलुक के पितुलसाहा इलाके का रहने वाला है।
आरोप है कि अमित मंडल ने पदुमबसान के बूथ संख्या 242 के 343 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए फॉर्म-7 जमा किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि जिन लोगों के नाम हटाने के लिए आवेदन दिया गया था, उनमें उसी बूथ के बीएलओ (बूथ स्तर अधिकारी) अफफाक अली बेग के परिवार के सदस्य भी शामिल थे। अफफाक अली के अनुसार, उनके परिवार की कई महिलाओं, जिनमें उनकी माँ और शिक्षा रत्न पुरस्कार से सम्मानित शिक्षिका आरजुमान लैला भी शामिल हैं, के नाम हटाने के लिए फर्जी फॉर्म भरे गए थे।
बीएलओ द्वारा स्थानीय थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अमित मंडल को गिरफ्तार कर लिया। जिला प्रशासन की शुरुआती जांच में एक और संदिग्ध तथ्य सामने आया है—आरोपी का घर उस बूथ से लगभग 12 किलोमीटर दूर है, जहाँ के मतदाताओं के नाम वह हटवाना चाहता था। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर किस आधार पर और किस मंशा से इतनी बड़ी संख्या में फॉर्म जमा किए गए।
इस घटना ने राज्य में राजनीतिक भूचाल ला दिया है। तृणमूल कांग्रेस और खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंबे समय से आरोप लगाती रही हैं कि भाजपा साजिश के तहत वैध मतदाताओं के नाम कटवा रही है। दूसरी ओर, स्थानीय भाजपा नेतृत्व ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है। भाजपा नेताओं का तर्क है कि फॉर्म-7 आपत्ति दर्ज कराने का एक कानूनी तरीका है, इसके लिए गिरफ्तारी करना अनुचित है। वे इस मामले में अब कानूनी विशेषज्ञों की सलाह ले रहे हैं।