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शंकराचार्य विवाद पर भाजपा की परेशानी बढ़ी

भाजपा की अपनी ट्रोल आर्मी भी अब ट्रोल होने लगी है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः अमित शाह और योगी आदित्यनाथ के बीच की तनातनी अब भाजपा के गले की हड्डी बन गयी है। प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या पर ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और पुलिस प्रशासन के बीच उपजा विवाद अब राष्ट्रव्यापी चर्चा का विषय बन गया है।

इस घटना ने न केवल धार्मिक गलियारों में बल्कि राजनीतिक हलकों में भी तीव्र प्रतिक्रिया उत्पन्न की है। मजेदार बात यह है कि अब प्रशासन उनसे शंकराचार्य होने का सबूत मांग रहा है जबकि इसी प्रशासन ने कुंभ मेला के दौरान उन्हें बतौर शंकराचार्य स्वीकार किया था। लोग मान रहे हैं कि शंकराचार्य द्वारा दिये गये कई बयान यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नागवार लगा। इससे उनके तेवर को भांपते हुए प्रशासनिक अधिकारियों ने शंकराचार्य के साथ गये शिष्यों के साथ मार पीट तक कर दी।

आम तौर पर भाजपा की ट्रोल आर्मी ऐसे मौके पर तुरंत ही शंकराचार्य के खिलाफ माहौल बनाने में उतर गयी थी लेकिन धीरे धीरे हिंदू समाज के दूसरे संतों और प्रमुख लोगों की प्रतिक्रिया आने के बाद पहली बार सोशल मीडिया पर ऐसे ट्रोल आर्मी के सैनिकों को भी आम लोग ट्रोल करने लगे हैं।

लोगों ने यह देखा है कि शंकराचार्य को रोकने के दूसरी तरफ कई अन्य सरकार भक्त संतों को किस तरीके से स्नान के लिए जाने दिया गया। प्राचीन परंपरा को अचानक चुनौती देना अब योगी सरकार के लिए भारी पड़ रहा है। अपुष्ट जानकारी के मुताबिक खुद योगी के गोरखपुर पीठ के भीतर भी इसे लेकर असहज वातावरण है।

भाजपा के नेता भी माहौल को भांपते हुए इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर बयान देने से कतरा रहे हैं। यह अलग बात है कि सरकार समर्थक कई संत योगी आदित्यनाथ के बचाव में शंकराचार्य के खिलाफ बोल रहे हैं पर उनकी संख्या नगण्य है जबकि इस घटना का विरोध करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।

इस घटना ने राजनीतिक रूप ले लिया है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे भाजपा सरकार का कुशासन और अहंकार बताया, वहीं कांग्रेस ने उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस घटना के वीडियो वायरल होने के बाद साधु-संतों और हिंदू संगठनों में भारी रोष देखा जा रहा है।