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ब्रिटेन के वेल्स में समुद्री युद्धाभ्यास जारी रहा

डच युद्धपोत ने ड्रोन झुंड को मार गिराया

वेल्सः समुद्री सुरक्षा और आधुनिक युद्ध कौशल के बदलते स्वरूप ने दुनिया भर की नौसेनाओं को अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। बाल्टिक सागर से लेकर लाल सागर तक, मानवरहित प्रणालियों के प्रसार ने सैन्य निगरानी और युद्ध की जटिलता को बढ़ा दिया है। पारंपरिक नौसैनिक बेड़े, जो आमने-सामने के युद्ध के लिए डिज़ाइन किए गए थे, अब तकनीकी दबाव के कारण खुद को ढालने की कोशिश कर रहे हैं।

हाल ही में वेल्स (यूके) के तट पर आयोजित एक्सरसाइज शार्पशूटर के दौरान इन चुनौतियों का जीवंत परीक्षण किया गया। इस अभ्यास में नीदरलैंड के शाही नौसेना के युद्धपोत ने भाग लिया। इस युद्धाभ्यास का मुख्य उद्देश्य ड्रोन झुंड और स्वायत्त सतही जहाजों से निपटने की क्षमता को परखना था।

इस अभ्यास के दौरान डच युद्धपोत ने तट से 20 मील दूर सक्रिय होकर बनशी व्हर्लविंड नामक हवाई ड्रोन और हैमरहेड नामक मानवरहित सतही जहाजों को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। रॉयल नीदरलैंड नेवी के कमांडर मार्सेल केवेलिंग ने पुष्टि की कि एवर्टसन ने पांच हवाई लक्ष्यों को नष्ट किया और दो समुद्री ड्रोन जहाजों को डुबो दिया।

यह अभ्यास केवल लाइव-फायरिंग तक सीमित नहीं था। इसमें सिंथेटिक यानी आभासी खतरों को भी जोड़ा गया था। रडार स्क्रीन पर वास्तविक ड्रोन्स के साथ-साथ आभासी क्रूज मिसाइलें, बैलिस्टिक प्रोजेक्टाइल और दुश्मन के विमानों का अनुकरण किया गया। इस हाइब्रिड डिजाइन ने नौसेना की शुरुआती पहचान से लेकर अंतिम प्रहार तक की पूरी प्रक्रिया का परीक्षण किया। यह उन स्थितियों का अभ्यास था जहाँ एक साथ कई दिशाओं से हमले होते हैं, जो कुछ ही सेकंड में किसी भी रक्षा प्रणाली को ध्वस्त कर सकते हैं।

यह अभ्यास उस व्यापक श्रृंखला का हिस्सा है जिसमें यूके और 11 नाटो सदस्य देशों के संयुक्त अभ्यास (जैसे फॉर्मिडेबल शील्ड) शामिल रहे हैं। ये मिशन दर्शाते हैं कि भविष्य के युद्ध केवल बड़े जहाजों के बीच नहीं, बल्कि छोटे, नेटवर्क वाले और स्वायत्त प्रणालियों के विरुद्ध लड़े जाएंगे। सामरिक योजना बनाने वाली संस्था के अनुसार, सिग्नल-जैमींन ड्रोन और सुपरसोनिक खतरों से निपटना अब केवल एक थ्योरी नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक आवश्यकता बन गया है।