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सरकारी वीडियो साक्ष्य में वांगचुक नहीं है

शीर्ष अदालत में नई दलील से हलचल मच गयी

  • कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया

  • लोगों की आवाज दबाने की साजिश

  • उनकी पत्नी ने भी यही दलील दी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और सुधारक सोनम वांगचुक की हिरासत को लेकर मामला अब देश की सर्वोच्च अदालत की दहलीज पर है। सोमवार को वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष दलील दी कि प्रशासन द्वारा जिन वीडियो साक्ष्यों के आधार पर वांगचुक को हिरासत में लिया गया है, उनमें वे कहीं दिखाई नहीं दे रहे हैं। यह दलील उस समय दी गई जब अदालत वांगचुक की आवाजाही पर लगी पाबंदियों और उनके समर्थकों की हिरासत के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

सिब्बल ने अदालत को बताया कि अधिकारियों ने जिन वीडियो फुटेज का हवाला देकर वांगचुक को कानून-व्यवस्था के लिए खतरा बताया है, उनमें उनकी उपस्थिति ही संदिग्ध है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी नागरिक को केवल अनुमानों या दूसरों के कृत्यों के आधार पर उसकी स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता। यह मामला तब गरमाया जब वांगचुक और उनके समर्थकों ने लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची के तहत लाने और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर दिल्ली चलो मार्च शुरू किया था।

सोनम वांगचुक की पत्नी ने भी न्यायालय को सूचित किया है कि उनके पति को लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने से रोका जा रहा है। उन्होंने प्रशासन पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि यह न केवल उनके पति के मौलिक अधिकारों का हनन है, बल्कि लद्दाख के लोगों की आवाज को दबाने की कोशिश भी है।

गौरतलब है कि वांगचुक पिछले कई महीनों से लद्दाख के नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र और वहां के निवासियों के अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे हैं। अदालत अब इस मामले में सरकार और प्रशासन से जवाब तलब कर सकती है कि आखिर किस आधार पर और किन ठोस सबूतों के साथ एक प्रतिष्ठित नागरिक को हिरासत में रखा गया है। यह सुनवाई आने वाले दिनों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच एक बड़ी बहस का केंद्र बन सकती है।