आगजनी और तोड़फोड़ के बाद निषेधाज्ञा लागू
राष्ट्रीय खबर
अगरतलाः त्रिपुरा के ऊनाकोटी जिले में स्थित कुमारघाट उप-मंडल के सईदरपार इलाके में हुई हालिया सांप्रदायिक हिंसा ने राज्य के सामाजिक सद्भाव और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार, हिंसा की शुरुआत शनिवार सुबह उस समय हुई जब एक स्थानीय हिंदू मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने को लेकर दो पक्षों में तीखी बहस हो गई।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि दक्षिणपंथी समूहों से जुड़े कुछ कार्यकर्ता एक मुस्लिम दुकानदार, अली, के पास चंदा मांगने पहुंचे थे। अली द्वारा यह कहे जाने पर कि वह कुछ राशि पहले ही दे चुका है और बाकी बाद में देगा, बात बिगड़ गई। आरोप है कि इसके बाद भीड़ ने न केवल दुकानदार के साथ मारपीट की, बल्कि देखते ही देखते हिंसा पूरे क्षेत्र में फैल गई।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय मौलाना अब्दुल मलिक के अनुसार, उपद्रवियों ने सईदुर पारा मस्जिद, पांच से छह मुस्लिम परिवारों के घरों और कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया। आगजनी की इस घटना में बाइक, कार और यहां तक कि एक ट्रैक्टर को भी नष्ट कर दिया गया। मस्जिद के साथ-साथ पास के कब्रिस्तानों को भी निशाना बनाने की खबरें आई हैं।
इस हमले में पुलिसकर्मियों सहित कम से कम दस लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हालांकि, सबसे गंभीर आरोप पुलिस की भूमिका पर लगा है; स्थानीय लोगों का दावा है कि हिंसा के वक्त सुरक्षा बल वहां मौजूद थे, लेकिन उन्होंने हमलावरों को रोकने के लिए कोई प्रभावी हस्तक्षेप नहीं किया।
पुलिस अधीक्षक अविनाश कुमार राय ने बताया कि स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए अब तक 10 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया है। वर्तमान में पूरे इलाके में अर्धसैनिक बलों द्वारा फुट पेट्रोलिंग और फ्लैग मार्च किया जा रहा है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 (जो पूर्व में धारा 144 थी) लागू कर दी है और अफवाहों को रोकने के लिए इंटरनेट सेवाओं पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है।
राजनीतिक स्तर पर, इस घटना ने भारी विवाद खड़ा कर दिया है। विपक्ष के नेता जितेंद्र चौधरी और कांग्रेस विधायक दल के नेता बिराजित सिन्हा ने भाजपा सरकार की कड़ी आलोचना की है। चौधरी ने आरोप लगाया कि जब कुमारघाट जल रहा था, तब मुख्यमंत्री उत्तर त्रिपुरा में राजनीतिक रोड शो में व्यस्त थे और उन्होंने अब तक इस सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ कोई ठोस बयान नहीं दिया है। विपक्ष का तर्क है कि सरकार अल्पसंख्यकों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है। वर्तमान में स्थिति तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रण में बताई जा रही है।