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डेनमार्क ने कहा गोली मारकर पूछेंगे कि कौन है

ट्रंप ने अपने जनरलों से हमला की योजना बनाने को कहा

  • कमांडरों ने कांग्रेस की मंजूरी की बात कही

  • वेनेजुएला की घटना के बाद उत्साहित हैं

  • ई यू और नाटो दोनों ने विरोध दर्ज कराया

कोपेनहेगन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर संभावित कब्जे के लिए सैन्य विकल्प तलाशने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप ने वरिष्ठ विशेष बल कमांडरों को ग्रीनलैंड पर आक्रमण की आकस्मिक योजनातैयार करने का निर्देश दिया है। हालांकि, पेंटागन के शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने इस योजना को अवैध और पागलपन करार देते हुए इसका कड़ा विरोध किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड से आक्रमण का खाका मांगा है। लेकिन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि ऐसी किसी भी कार्रवाई के लिए कांग्रेस की मंजूरी नहीं है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ होगी। अधिकारियों ने यहां तक कहा कि राष्ट्रपति को शांत रखने के लिए उन्हें रूसी घोस्ट जहाजों या ईरान पर हमले जैसे अन्य विकल्पों से भटकाने की कोशिश की जा रही है।

ट्रंप के कट्टरपंथी सलाहकार, विशेषकर स्टीफन मिलर, वेनेजुएला में निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के बाद उत्साहित हैं और चाहते हैं कि रूस या चीन के आर्कटिक में पैर पसारने से पहले अमेरिका ग्रीनलैंड पर नियंत्रण कर ले।

दूसरी ओर, ग्रीनलैंड के राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर ट्रंप के दबाव को खारिज कर दिया है। पांच प्रमुख दलों ने साझा बयान में कहा, हम अमेरिकी या डेनिश नहीं, बल्कि ग्रीनलैंडिक रहना चाहते हैं। हमारे भविष्य का फैसला हम खुद करेंगे।

ट्रंप के इस बयान पर कि वे ग्रीनलैंड के साथ कोई सौदा आसान तरीके से या कठिन तरीके से करेंगे, डेनमार्क ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। डेनमार्क सरकार ने पुष्टि की है कि उसके सैनिक 1952 के उस निर्देश का पालन करेंगे, जिसके तहत किसी भी आक्रमणकारी पर पहले गोली मारो और सवाल बाद में पूछो की नीति लागू होती है। यूरोपीय संघ और नाटो ने भी स्पष्ट किया है कि ग्रीनलैंड अपने लोगों का है। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप की यह जिद नाटो को भीतर से नष्ट कर सकती है, जो शायद उनके कट्टरपंथी समर्थकों का वास्तविक लक्ष्य है। यदि अमेरिका सैन्य बल का प्रयोग करता है, तो यह गठबंधन के टूटने का कारण बन सकता है, जिससे वैश्विक सुरक्षा समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे।