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हमने भाजपा के लिए भी काम किया है:  प्रतीक जैन

ईडी की कार्रवाई के बाद झारखंड रणनीतिकार का खुलासा

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी के लिए चुनावी रणनीति बनाने वाली संस्था आई-पैक पर प्रवर्तन निदेशालय  की छापेमारी ने राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है। इस कार्रवाई के बाद आई-पैक के निदेशक प्रतीक जैन ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा है।

उन्होंने केंद्रीय एजेंसी के उन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया कि उनकी संस्था किसी अवैध वित्तीय लेन-देन या कोयला घोटाले में शामिल है। प्रतीक जैन ने जोर देकर कहा कि उनकी संस्था एक पेशेवर परामर्शदाता है और उसका राजनीति से परे भी एक स्वतंत्र अस्तित्व है।

सबसे चौंकाने वाला बयान देते हुए प्रतीक जैन ने कहा, हमें केवल एक पार्टी का रणनीतिकार कहना गलत है। अतीत में हमने भाजपा सहित देश की विभिन्न राजनीतिक विचारधाराओं और दलों के लिए काम किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आई-पैक का कामकाज डेटा विश्लेषण और जमीनी सर्वेक्षण पर आधारित है, न कि किसी घोटाले की फंडिंग पर।

जैन ने आरोप लगाया कि ईडी की यह कार्रवाई केवल आगामी बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी के चुनावी तंत्र को अस्थिर करने की एक कोशिश है। उन्होंने यह भी कहा कि छापेमारी के दौरान उनके निजी और पेशेवर डेटा को खंगालना निजता के अधिकारों का उल्लंघन है।

प्रतीक जैन ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के छापेमारी स्थल पर पहुँचने और विरोध करने का बचाव किया। उन्होंने कहा कि जब राज्य की कानून व्यवस्था और एक प्रतिष्ठित संस्था को बिना किसी ठोस सबूत के निशाना बनाया जाता है, तो राज्य के मुखिया का हस्तक्षेप स्वाभाविक है।

आई-पैक की ओर से जारी आधिकारिक बयान में कहा गया है कि संस्था के पास अपने सभी वित्तीय लेन-देन के वैध दस्तावेज मौजूद हैं और वे किसी भी निष्पक्ष जांच में सहयोग करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि जिस तरह से छापेमारी के नाम पर डेटा चोरी की कोशिश की गई, वह संदिग्ध है।

इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति और अधिक गरमा गई है। भाजपा ने प्रतीक जैन के इस दावे को हताशा में दिया गया झूठ बताया है कि उन्होंने कभी भाजपा के लिए काम किया था। वहीं, टीएमसी ने इस बयान को अपनी उस दलील के समर्थन में इस्तेमाल किया है कि आई-पैक एक स्वतंत्र पेशेवर इकाई है जिसे जानबूझकर राजनीतिक साजिश का शिकार बनाया जा रहा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईडी प्रतीक जैन के इन तर्कों के जवाब में कोई ठोस वित्तीय साक्ष्य पेश कर पाती है या नहीं।