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58 करोड़ के डिजिटल अरेस्ट घोटाले में कार्रवाई

महाराष्ट्र साइबर सेल ने पेश की करीब ढाई हजार पन्ने की चार्जशीट

  • 32 आरोपी अब तक गिरफ्तार हो चुके

  • 41 अन्य अपराधी अभी तक फऱार हैं

  • दस हजार फर्जी बैंक खातों का इस्तेमाल

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः महाराष्ट्र की नोडल साइबर अपराध एजेंसी महाराष्ट्र साइबर ने 58 करोड़ रुपये के सनसनीखेज डिजिटल अरेस्ट घोटाले में एक विस्तृत और भारी-भरकम आरोप पत्र दाखिल किया है।

एस्प्लेनेड कोर्ट के समक्ष पेश की गई यह चार्जशीट 2,458 पन्नों की है, जिसमें 32 गिरफ्तार आरोपियों के नाम शामिल किए गए हैं और 47 गवाहों की सूची दी गई है। हालांकि, मामले का मुख्य संदिग्ध विजय खन्ना सहित 41 अन्य आरोपी अभी भी फरार हैं और पुलिस उनकी तलाश कर रही है।

जांच के अनुसार, यह धोखाधड़ी 19 अगस्त 2025 से 8 अक्टूबर 2025 के बीच अंजाम दी गई। जालसाजों ने मुंबई के एक 72 वर्षीय व्यवसायी को अपना निशाना बनाया। ठगों ने खुद को प्रवर्तन अधिकारी बताकर पीड़ित को जाल में फंसाया और डिजिटल अरेस्ट की फर्जी कार्यवाही शुरू की।

इस दौरान वीडियो कॉल के जरिए फर्जी पूछताछ की गई और अदालत की फर्जी सुनवाई का नाटक रचा गया। मनोवैज्ञानिक दबाव बनाकर पीड़ित को 40 दिनों के भीतर 58.13 करोड़ स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया गया, जिससे व्यवसायी की जीवन भर की पूरी कमाई लुट गई।

साइबर एजेंसी ने खुलासा किया कि इस घोटाले के मास्टरमाइंड ने लूटे गए पैसों को ठिकाने लगाने के लिए 13 स्तरों में फैले 10,000 फर्जी बैंक खातों के एक जटिल नेटवर्क का उपयोग किया। ये खाते फर्जी शेल कंपनियों के नाम पर खोले गए थे ताकि पुलिस की पकड़ से बचा जा सके।

गिरफ्तार आरोपियों में अब्दुल नासिर, अर्जुन कडवासरा, जेठाराम, जाफर सैय्यद और कई अन्य शामिल हैं। डिजिटल अरेस्ट के इस मोडस ऑपरेंडी में अपराधी पुलिस या सरकारी एजेंसी का मुखौटा पहनकर पीड़ितों को कानूनी धमकियों से डराते हैं और उन्हें घंटों वीडियो कॉल पर रहने के लिए मजबूर करते हैं।

एजेंसी का कहना है कि विजय खन्ना जैसे मुख्य संदिग्धों की गिरफ्तारी के बाद इस सिंडिकेट के और भी गहरे राज खुलने की उम्मीद है। महाराष्ट्र साइबर अब मनी ट्रेल का पीछा कर रही है ताकि लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की अतिरिक्त परतों की पहचान की जा सके। यह मामला देश के सबसे बड़े साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों में से एक बनकर उभरा है।