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ढाई साल में भी नहीं मिली अनुकंपा नियुक्ति, आश्वासन की फाइलों में दब गई 1256 परिवारों की जिंदगी

रायपुर: छत्तीसगढ़ में अनुकंपा नियुक्ति की आस लगाए 1256 परिवारों का सब्र अब जवाब दे चुका है. जनदर्शन में पहुंचे पीड़ित परिजनों ने सरकार से दो टूक कहा कि अब आश्वासन नहीं, रोजगार चाहिए.

“मुख्यमंत्री से मिले, लेकिन फिर वही भरोसे की घिसी-पिटी बात”

गुरुवार को मुख्यमंत्री निवास में आयोजित जनदर्शन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाएं और पीड़ित परिजन पहुंचे. इन लोगों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी अनुकंपा नियुक्ति की मांग रखी. मुलाकात के बाद परिजनों ने बताया कि उन्हें एक बार फिर सिर्फ “भरोसा रखने” की सलाह दी गई है, लेकिन तारीख कोई नहीं.

1256 परिवार 9 साल का इंतजार, फिर भी फाइल में लिखा है – अपूर्ण

दिवंगत पंचायत शिक्षाकर्मियों के परिजनों ने बताया कि वे 2017 से लगातार चक्कर काट रहे हैं. अब तक कई बार ज्ञापन, आंदोलन, जनदर्शन सब हो चुका है.हर बार ऑनलाइन स्टेटस चेक करने पर सिर्फ एक ही शब्द दिखता है, “अपूर्ण”. उनका सवाल है, “अगर मांग पूरी हो गई होती तो हम बार-बार जनदर्शन क्यों आते?”

“विपक्ष में थे तो मंच से रोते थे, सत्ता में आए तो भूल गए”

पीड़ितों ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा “जब कांग्रेस की सरकार थी, तब भाजपा के नेता हमारे आंदोलन में मंच पर आते थे, ट्वीट करते थे,कहते थे – सरकार बनेगी तो अनुकंपा देंगे. आज वही लोग सत्ता में है लेकिन हमारी पीड़ा उन्हें दिखाई नहीं दे रही. यहां तक कि खुद मौजूदा मुख्यमंत्री ने भी उस वक्त ट्वीट कर संवेदना जताई थी, लेकिन आज वही संवेदना कहां गुम हो गई?”

“न उम्र रुकी है न भूख न बच्चों की ज़रूरतें”

अनुकंपा नियुक्ति की मांग को लेकर पहुंची एक महिला का दर्द छलक पड़ा. महिला ने बताया “नौकरी की उम्र निकलती जा रही है,बच्चे बड़े हो गए, उनकी पढ़ाई बर्बाद हो रही है. घर चलाना नामुमकिन होता जा रहा है. रोजी-रोटी का कोई सहारा नहीं है. नौकरी कोई लाइफटाइम नहीं मिलती, एक समय सीमा होती है, सरकार ये बात क्यों नहीं समझती?”

“एक साथी ने फिनायल पीकर जान देने की कोशिश की, फिर भी सरकार नहीं चेती”

पीड़ितों ने खुलासा किया कि हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि उनकी एक साथी ने पंचायत मंत्री के बंगले के पास फिनायल पीकर आत्महत्या करने की कोशिश की थी. इसके बावजूद सरकार ने इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया.

“27 को नौकरी… 1256 को इंतज़ार — ये कैसा न्याय?”

पीड़ितों का कहना है कि आदेश में सिर्फ 27 लोगों को पात्र माना गया, जबकि बाकी को बाहर कर दिया गया. उनकी मांग है कि नियमों में शिथिलता दी जाए. तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में योग्यता अनुसार नियुक्ति दी जाए. सभी 1256 परिवारों को एक साथ न्याय मिले.

“अब नहीं सुने गए तो उग्र आंदोलन”

महिलाओं ने साफ चेतावनी दी है कि जनदर्शन में शिकायत के बाद भी उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगी.महिलाएं कहती है कि वे अब तूता धरनास्थल पर नहीं बैठेंगी बल्कि रायपुर की सड़कों पर धरना प्रदर्शन करेंगी.