Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Himachal Crime: 'बेरोजगार, ऊपर से बीवी की कमाई...', ताने से भड़के पति ने पत्नी का गला रेता, फिर की ख... Supreme Court on Disability Pension: 'रोज 10 बीड़ी पीने से आया स्ट्रोक', पूर्व सैनिक की याचिका खारिज Punjabi Wedding Viral Video: क्या शादी में सच में उड़ाए 8 करोड़? जानिए नोटों की बारिश का सच Delhi Crime: 'पापा मुझे बचा लो...', बेटे की गुहार सुनकर दौड़े पिता को हमलावरों ने मारी गोली, मौत Shivpal Yadav on Brajesh Pathak: चोटी विवाद पर शिवपाल का डिप्टी सीएम पर वार, बोले- पाप तो आपको भी लग... Vaishno Devi Ropeway Protest: कटरा में भारी बवाल, बाजार बंद और होटलों के बाहर लगे विरोध के पोस्टर पृथ्वी की सतह के नीचे मिला अदृश्य महासागर मस्तिष्क के रहस्यमयी चौकीदार की पहचान हुई सोनम वांगचुक मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को फटकारा राफेल विमानों सौदे पर टिकीं दुनिया की नजरें

पाकिस्तानी हैंडलरों से संपर्क में थे आंतकी नेटवर्क के लोग

बात के लिए घोस्ट सिम कार्ड का प्रयोग किया

नई दिल्ली: पिछले वर्ष 10 नवंबर को देश की राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के समीप हुए शक्तिशाली विस्फोट की जाँच में सुरक्षा एजेंसियों ने बेहद चौंकाने वाले और चिंताजनक खुलासे किए हैं। रविवार को आधिकारिक सूत्रों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, इस व्हाइट-कॉलर आतंकी मॉड्यूल में शामिल आरोपी कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित डॉक्टर थे।

इन डॉक्टरों ने सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचने के लिए घोस्ट (फर्जी) सिम कार्डों और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का एक ऐसा परिष्कृत और जटिल जाल बुना था, जिसे भेदना चुनौतीपूर्ण था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए भारत सरकार के दूरसंचार विभाग ने अब एक ऐतिहासिक और कड़ा निर्देश जारी किया है, जिसके तहत व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे संचार ऐप्स का उपयोग करने के लिए डिवाइस में एक सक्रिय फिजिकल सिम कार्ड का होना अनिवार्य कर दिया गया है।

जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि गिरफ्तार किए गए डॉक्टर मुजम्मिल गनई, अदील राथर और उनके अन्य साथी एक विशेष डुअल-फोन (दोहरे फोन) प्रोटोकॉल का पालन करते थे। उनके पास एक साफ फोन होता था, जो उनके अपने असली नाम और पहचान पत्र पर पंजीकृत था। इस फोन का उपयोग वे अपने दैनिक व्यक्तिगत और पेशेवर कार्यों के लिए करते थे ताकि किसी को उन पर संदेह न हो।

वहीं, उनका दूसरा फोन टेरर फोन कहलाता था, जिसमें अनजान नागरिकों के आधार विवरणों का दुरुपयोग कर या फर्जी आधार कार्ड के जरिए हासिल किए गए सिम कार्ड लगे होते थे। इस फोन का इस्तेमाल विशेष रूप से पाकिस्तान में बैठे उनके आकाओं—जिनके कोड नाम उकासा, फैजान और हाशमी थे—से संपर्क साधने के लिए किया जाता था। लाल किले के पास विस्फोटक से लदी गाड़ी चलाते समय मारा गया डॉक्टर उमर-उन-नबी भी अपने पास दो से तीन मोबाइल हैंडसेट रखता था।

आतंकी आकाओं ने इन मैसेजिंग ऐप्स के उस तकनीकी फीचर का भरपूर फायदा उठाया, जो बिना सिम कार्ड के भी वाई-फाई या इंटरनेट के जरिए चैटिंग की सुविधा देता है। इसी के माध्यम से उन्होंने इन पढ़े-लिखे युवाओं को यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर आईईडी असेंबली और विस्फोट करने का प्रशिक्षण दिया।

इन गंभीर सुरक्षा कमियों को पाटने के लिए केंद्र सरकार ने अब दूरसंचार अधिनियम 2023 और टेलीकॉम साइबर सुरक्षा नियमों को लागू कर दिया है। अब सभी डिजिटल सेवा प्रदाताओं और ऐप्स को 90 दिनों के भीतर यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके प्लेटफॉर्म केवल तभी सक्रिय रहें जब डिवाइस में वैध सिम मौजूद हो। यदि कोई कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है, तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।