हिंदू पुलिस अफसर को जलाकर मारने का दावा
ढाकाः बांग्लादेश से एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें स्टूडेंट्स अगेंस्ट डिस्क्रिमिनेशन के एक स्थानीय नेता को एक हिंदू पुलिस अधिकारी की हत्या की बात कबूलते और उस पर गर्व करते हुए देखा जा सकता है। यह संगठन वही है जिसने 2024 के उन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था, जिसके बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता छोड़नी पड़ी थी। वीडियो में हबीगंज जिले के एसएडी इकाई के सचिव मेहदी हसन एक पुलिस स्टेशन में पुलिसकर्मियों को धमकी देते हुए दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में हसन को यह कहते सुना जा सकता है, हमने बनियाचोंग पुलिस स्टेशन को जला दिया, हमने एसआई संतोष को आग लगा दी। यह घटना 5 अगस्त 2024 की है, जिस दिन शेख हसीना ने इस्तीफा दिया था। रिपोर्टों के अनुसार, उस दिन भीड़ ने बनियाचोंग पुलिस स्टेशन पर हमला कर वहां तैनात सब-इंस्पेक्टर संतोष, जो हिंदू समुदाय से थे, की बेरहमी से हत्या कर दी थी। भीड़ ने उनके शव को सड़क पर प्रदर्शित कर अपमानित भी किया था। इस वीडियो के सामने आने के बाद भारी आक्रोश है, जिसके जवाब में एसएडी ने हसन को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
अगस्त 2024 में हसीना सरकार के पतन के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की खबरें लगातार आ रही हैं। मानवाधिकार संगठनों ने बड़े पैमाने पर तोड़फोड़, लूटपाट और हत्याओं का दस्तावेजीकरण किया है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान भी स्थिति में सुधार नहीं दिख रहा है। दिसंबर 2025 के अंत में भी म्यांनसिंह जिले में दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू श्रमिक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई और उसके शव को जला दिया गया।
यह वायरल वीडियो इस बात की पुष्टि करता है कि छात्र आंदोलनों की आड़ में कट्टरपंथी तत्वों ने योजनाबद्ध तरीके से हिंदू अधिकारियों और नागरिकों को निशाना बनाया। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार समूह अब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त कर रहे हैं। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वहां सांप्रदायिक तनाव की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं।