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थ्री डी प्रिंटिंग से तैयार हुआ मजबूत एल्युमीनियम

एमआईटी के वैज्ञानिकों ने अंततः कर दिखाया नया कमाल

  • मशीन लर्निंग और सिमुलेशन का मेल

  • नई औद्योगिक क्रांति की संभावना

  • थ्री डी प्रिंटिंग और फास्ट कूलिंग का जादू

राष्ट्रीय खबर

रांचीः मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के इंजीनियरों ने एक ऐसी नई एल्युमीनियम मिश्र धातु विकसित की है, जिसे न केवल थ्री डी प्रिंट किया जा सकता है, बल्कि यह अत्यधिक गर्मी सहने में भी सक्षम है। परीक्षणों में यह सामग्री पारंपरिक निर्माण तकनीकों से बने एल्युमीनियम की तुलना में पांच गुना अधिक मजबूत पाई गई है।

इस मिश्र धातु को बनाने के लिए शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर सिमुलेशन और मशीन लर्निंग का सहारा लिया। पारंपरिक तरीकों से सही फॉर्मूला खोजने के लिए 10 लाख से अधिक संयोजनों की जांच करनी पड़ती, लेकिन मशीन लर्निंग मॉडल ने इस संख्या को घटाकर केवल 40 संभावित विकल्पों तक सीमित कर दिया। जब इस सामग्री का परीक्षण किया गया, तो इसके परिणाम उम्मीदों पर खरे उतरे। यह प्रिंटेड धातु वर्तमान में कास्टिंग के जरिए बनाई जाने वाली सबसे मजबूत मिश्र धातुओं के बराबर प्रदर्शन करती है।

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हल्की और मजबूत होने के कारण इस धातु का उपयोग जेट इंजन के पंखों में किया जा सकता है। वर्तमान में ये पंखे टाइटेनियम से बनते हैं, जो एल्युमीनियम से 50 प्रतिशत भारी और 10 गुना अधिक महंगे होते हैं।  शोध का नेतृत्व करने वाली मोहद्देसे ताहेरी-मौसावी (जो अब कार्नेगी मेलन यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं) का कहना है कि हल्की और उच्च-शक्ति वाली सामग्री परिवहन उद्योग में ऊर्जा की भारी बचत करेगी। एमआईटी के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रमुख जॉन हार्ट के अनुसार, इसका उपयोग विमानन के अलावा हाई-एंड कारों, डेटा सेंटर कूलिंग डिवाइस और वैक्यूम पंपों में भी किया जा सकेगा।

एल्युमीनियम की मजबूती उसके सूक्ष्म ढांचे (माइक्रोस्ट्रक्चर) पर निर्भर करती है, जिसे ‘प्रेसिपिटेट्स’ कहा जाता है। पारंपरिक कास्टिंग में धातु धीरे-धीरे ठंडी होती है, जिससे ये प्रेसिपिलेट्स बड़े हो जाते हैं और मजबूती कम हो जाती है। इसके विपरीत, थ्री डी प्रिंटिंग (विशेष रूप से लेजर बेड पाउडर फ्यूजन) में लेजर द्वारा पिघलाई गई धातु बहुत तेजी से जमती है। यह ‘रैपिड फ्रीजिंग’ तकनीक मशीन लर्निंग द्वारा सुझाए गए सूक्ष्म ढांचे को सुरक्षित रखती है, जिससे धातु को असाधारण मजबूती मिलती है।

परीक्षणों में यह भी पाया गया कि यह नई धातु 400 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान पर स्थिर रहती है, जो एल्युमीनियम आधारित सामग्रियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। ताहेरी-मौसावी का सपना है कि एक दिन यात्री हवाई जहाज की खिड़की से बाहर देखते समय उनके द्वारा विकसित किए गए एल्युमीनियम अलॉय से बने इंजन ब्लेड देखेंगे। इसके अलावा अन्य औद्योगिक इकाइयों में भी यह अधिक मजबूत मिश्र धातु शायद कई अत्यंत जटिल संरचनाओँ के लिए लोहे का बेहतर कार्यकुशल विकल्प के तौर पर भी तैयार हो।

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