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ईपीएफओ में कायाकल्प की तैयारी जोरों पर

अब पासपोर्ट कार्यालय की तरह काम करेंगे इसके दफ्तर

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के करोड़ों खाताधारकों के लिए केंद्र सरकार एक क्रांतिकारी बदलाव लाने जा रही है। पीएफ कार्यालयों को अब सिंगल विंडो सर्विस सेंटर्स के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसका कार्य मॉडल पासपोर्ट कार्यालयों जैसा सुगम और पारदर्शी होगा।

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने हाल ही में दिल्ली में भविष्य निधि भवन के उद्घाटन के अवसर पर इस योजना की घोषणा की। इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि पीएफ अंशदाताओं को अब अपने विशिष्ट क्षेत्रीय कार्यालय तक दौड़ने की आवश्यकता नहीं होगी; वे देश के किसी भी ईपीएफओ कार्यालय में जाकर अपनी समस्याओं का समाधान पा सकेंगे।

वर्तमान व्यवस्था के अनुसार, कर्मचारियों को अपनी शिकायतों या दावों के लिए उसी क्षेत्रीय कार्यालय से संपर्क करना पड़ता है, जहाँ उनका संस्थान पंजीकृत होता है। लेकिन अब डिजिटल इंडिया की शक्ति का उपयोग करते हुए पूरे सिस्टम को एकीकृत किया जा रहा है। जिन कर्मचारियों को डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग करने में कठिनाई होती है, उनके लिए ईपीएफ सुविधा प्रोवाइडर नाम से एक नया तंत्र तैयार किया जा रहा है। ये सेवा प्रदाता एक सेतु के रूप में कार्य करेंगे और दावा निपटान प्रक्रिया में खाताधारकों की सीधे सहायता करेंगे।

सरकार का विशेष ध्यान उन खाताधारकों पर भी है जिनका पैसा वर्षों से केवाईसी मुद्दों या अन्य तकनीकी कारणों से फंसा हुआ है। मंत्री मांडविया ने स्पष्ट किया कि विभाग अब मिशन मोड में कार्य करेगा ताकि फंसे हुए धन को सही लाभार्थियों या उनके उत्तराधिकारियों तक पहुंचाया जा सके। इसके अतिरिक्त, यदि कोई भारतीय नागरिक विदेश में काम करके वापस लौटता है, तो एक विशेष समझौते के तहत वहां कटा हुआ पीएफ भी वह भारत में प्राप्त कर सकेगा। आंकड़ों के अनुसार, 2014 में सामाजिक सुरक्षा का दायरा मात्र 19 प्रतिशत था, जो अब बढ़कर 64 प्रतिशत हो गया है। सरकार का लक्ष्य इसे और अधिक सरल बनाकर भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका को पूरी तरह समाप्त करना है।