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ताइवान और चीन के बीच सैन्य सक्रियता और बढ़

जलडमरूमध्य में युद्धपोतों की तैनाती दिखी

ताइपेः एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भू-राजनीतिक पारा एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। ताइपे से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, पिछले 12 घंटों में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने ताइवान की संप्रभुता को चुनौती देते हुए एक बड़े सैन्य ऑपरेशन को अंजाम दिया है।

ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि चीन के 22 उन्नत लड़ाकू विमानों और 6 भारी युद्धपोतों ने मीडियन लाइन का उल्लंघन किया है। ऐतिहासिक रूप से यह रेखा चीन और ताइवान के बीच एक अलिखित सुरक्षा कवच या अनौपचारिक सीमा रही है, जिसे पार करना सीधे तौर पर उकसावे की कार्रवाई माना जाता है।

इस घुसपैठ के जवाब में ताइवान ने अपनी रक्षात्मक तैयारी को कॉम्बैट रेडी मोड पर डाल दिया है। द्वीप की स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों को सक्रिय कर दिया गया है और तटवर्ती राडार स्टेशन लगातार चीनी गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं। ताइवान के आसमान में उसके अपने लड़ाकू विमान गश्त लगा रहे हैं ताकि किसी भी संभावित हवाई हमले का तुरंत जवाब दिया जा सके। चीन के रक्षा मंत्रालय ने इसे नियमित युद्धाभ्यास का नाम दिया है, लेकिन ताइपे का मानना है कि यह उसकी लोकतांत्रिक चुनी हुई सरकार को डराने और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीति है।

इस तनाव का प्रभाव केवल क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं है। वाशिंगटन ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए बीजिंग को यथास्थिति बदलने के खिलाफ चेतावनी दी है। अमेरिका की चिंता का मुख्य कारण यह है कि यह क्षेत्र दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दक्षिण चीन सागर में किसी भी प्रकार का सैन्य संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था को घुटनों पर ला सकता है।

सबसे बड़ा खतरा तकनीकी जगत के लिए है। ताइवान दुनिया का सेमीकंडक्टर हब है; स्मार्टफोन से लेकर सुपर कंप्यूटर तक में इस्तेमाल होने वाली चिप्स की 90 प्रतिशत आपूर्ति यहीं से होती है। विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि यदि ताइवान जलडमरूमध्य में युद्ध जैसी स्थिति बनती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगी, जिससे दुनिया भर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की भारी कमी और कीमतों में बेतहाशा वृद्धि हो सकती है। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें बीजिंग और ताइपे के अगले कदम पर टिकी हैं।