पटियाला के ढाबे पर हुई वारदात पर न्यायिक प्रक्रिया तेज
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़: पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली और वर्दी के अहंकार से जुड़े एक बहुचर्चित मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो ने एक निर्णायक कदम उठाया है। पटियाला में तैनात रहे कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाथ और उनके बेटे के साथ हुई बर्बरता के मामले में एजेंसी ने पंजाब पुलिस के चार अधिकारियों के विरुद्ध मोहाली की विशेष अदालत में विस्तृत आरोप पत्र दाखिल कर दी है।
इस कार्रवाई ने खाकी वर्दी की जवाबदेही पर एक बार फिर गंभीर बहस छेड़ दी है।सादे कपड़ों में गुंडागर्दी का आरोपयह पूरा विवाद मार्च 2024 की एक रात का है, जब भारतीय सेना के सेवारत अधिकारी कर्नल पुष्पिंदर सिंह बाथ अपने बेटे के साथ पटियाला के राजिंदरा अस्पताल के समीप एक ढाबे पर भोजन कर रहे थे।
आरोप है कि वहां मौजूद सादे कपड़ों में कुछ पुलिसकर्मियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार शुरू किया। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि दर्जनों पुलिसकर्मियों ने कानून को अपने हाथ में ले लिया। परिजनों का दावा है कि कर्नल और उनके बेटे पर लोहे की रॉड और डंडों से जानलेवा हमला किया गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि कर्नल बाथ द्वारा बार-बार अपनी सैन्य पहचान बताने और अपना परिचय पत्र दिखाने के बावजूद, पुलिसकर्मियों का गुस्सा शांत नहीं हुआ और वे उन्हें गंभीर रूप से घायल करने तक पीटते रहे। हाईकोर्ट की दखल और सीबीई की जांच में घटना के बाद शुरुआत में पटियाला पुलिस ने मामला दर्ज किया था, जिसमें हत्या के प्रयास जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई थीं।
हालाँकि, पीड़ित परिवार ने स्थानीय पुलिस की निष्पक्षता पर संदेह जताया। परिवार का आरोप था कि पुलिस अपने ही महकमे के रसूखदार अधिकारियों को बचाने की कोशिश कर रही है। न्याय की गुहार लगाते हुए परिवार पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट पहुँचा। मामले की गंभीरता और एक सैन्य अधिकारी के साथ हुए अमानवीय व्यवहार को देखते हुए अदालत ने जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंप दिया।
चार्जशीट में नामजद अधिकारी सीबीआई ने अपनी गहन तफ्तीश के बाद इंस्पेक्टर हैरी बोपाराय, रोनी सिंह और हरजिंदर ढिल्लों सहित चार पुलिसकर्मियों को इस हिंसा का मुख्य जिम्मेदार माना है। एजेंसी ने साक्ष्य जुटाए हैं कि इन अधिकारियों ने न केवल अपनी शक्ति का दुरुपयोग किया, बल्कि एक निहत्थे नागरिक और देश की सुरक्षा में तैनात अधिकारी की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई। कर्नल की पत्नी जसविंदर कौर बाथ ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि लंबे समय बाद उन्हें न्याय की उम्मीद जगी है। यह मामला अब केवल दो व्यक्तियों के बीच का विवाद नहीं, बल्कि देश के दो सबसे अनुशासित संस्थानों—सेना और पुलिस—के बीच आपसी सम्मान और कानूनी मर्यादाओं का एक बड़ा परीक्षण बन गया है।