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लोकसभा अध्यक्ष की चाय पार्टी में प्रियंका के जाने पर आपत्ति

माकपा सांसद ब्रिटास ने इसे गरीबों के खिलाफ बताया

  • मनरेगा खत्म करने के बाद ऐसा हुआ

  • विपक्ष के विरोध का तरीका यही है

  • पहले भी विपक्ष ने वहिष्कार किया है

राष्ट्रीय खबर

तिरुअनंतपुरम/नई दिल्ली: संसद के शीतकालीन सत्र के समापन के दौरान आयोजित पारंपरिक कार्यक्रमों ने अब एक नए राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया है। सीपीआई(एम) के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने कांग्रेस की नवनिर्वाचित सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की टी-पार्टी में शामिल होने पर कड़ी आपत्ति जताई है। इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति ने इस आलोचना को और अधिक हवा दे दी है।

मनरेगा के बहाने कांग्रेस पर प्रहार जॉन ब्रिटास ने इस शिष्टाचार भेंट को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। उन्होंने इसके पीछे का मुख्य कारण उसी दिन संसद में पारित हुए विकसित भारत – रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) कानून को बताया। ब्रिटास का तर्क है कि सरकार ने इस नए कानून के माध्यम से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के मूल ढांचे को ध्वस्त कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब करोड़ों मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा था, तब कांग्रेस के बड़े नेताओं का सत्ता पक्ष के साथ चाय पीना देश के गरीबों को गलत संदेश देता है।

बहिष्कार की परंपरा और राजनीतिक नैतिकता ब्रिटास ने अतीत के कई उदाहरण देते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने हमेशा विरोध दर्ज कराने के लिए ऐसी औपचारिक सभाओं का बहिष्कार किया है। उन्होंने पिछले साल के शीतकालीन सत्र का जिक्र किया, जब विपक्ष ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा डॉ. बी.आर. अंबेडकर पर की गई कथित अपमानजनक टिप्पणियों के विरोध में चाय भोज में हिस्सा नहीं लिया था। ब्रिटास ने तंज कसते हुए सवाल किया कि एक तरफ सरकार मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाकर उनकी विरासत को चोट पहुँचा रही है, और दूसरी तरफ कांग्रेस नेता प्रधानमंत्री के साथ मुस्कराते हुए फोटो खिंचवा रहे हैं। उनके अनुसार, यह गांधी की दूसरी बार हत्या जैसा है।

संसदीय पद और वायनाड की उपेक्षा वामपंथी सांसद ने प्रियंका गांधी की सांगठनिक भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने रेखांकित किया कि प्रियंका गांधी कांग्रेस संसदीय दल में किसी औपचारिक नेतृत्व पद पर नहीं हैं। दिलचस्प बात यह रही कि जहाँ कांग्रेस के संसदीय दल के नेता और उपनेता इस कार्यक्रम में नहीं दिखे, वहीं प्रियंका गांधी की उपस्थिति ने कई सवाल खड़े किए। ब्रिटास ने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान प्रियंका ने अपने निर्वाचन क्षेत्र वायनाड की समस्याओं या वहां के आपदा प्रभावित लोगों की मांगों को लेकर कोई बात नहीं की। उन्होंने सरकार पर यह आरोप भी जड़ा कि वह धीरे-धीरे मुद्रा नोटों से गांधी जी की तस्वीर हटाने की भूमिका तैयार कर रही है, जिसका विरोध करने के बजाय कांग्रेस सद्भावना दिखा रही है।