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असम विधानसभा के ठीक पहले प्रियंका गांधी को जिम्मेदारी

अब प्रत्याशियों के चयन कमेटी की अध्यक्ष बनी

  • पूर्वोत्तर में ताकत बढ़ाने जा रही कांग्रेस

  • इस कमेटी में तीन और सदस्य शामिल

  • असम में पहले से महागठबंधन बनाया

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने आगामी असम विधानसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीति को आक्रामक रूप देते हुए संगठनात्मक स्तर पर बड़े बदलाव किए हैं। पार्टी आलाकमान ने अपनी सबसे प्रभावशाली नेता और महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा को असम के लिए गठित स्क्रीनिंग कमेटी का अध्यक्ष नियुक्त कर एक स्पष्ट संदेश दिया है कि पार्टी इस पूर्वोत्तर राज्य को वापस पाने के लिए पूरी ताकत झोंकने को तैयार है।

प्रियंका गांधी के नेतृत्व वाली इस महत्वपूर्ण समिति में पार्टी के तीन अन्य प्रमुख चेहरों—इमरान मसूद, सप्तगिरी शंकर उलका और डॉ. सिरिवेल्ला प्रसाद—को सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इस समिति का मुख्य कार्य जमीनी स्तर पर फीडबैक के आधार पर जिताऊ उम्मीदवारों का चयन करना और गुटबाजी को दरकिनार कर एक मजबूत सूची तैयार करना है।

असम के साथ-साथ कांग्रेस नेतृत्व ने पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी जैसे चुनावी राज्यों के लिए भी समान स्क्रीनिंग कमेटियों की घोषणा की है, ताकि समय रहते उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाया जा सके। असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव मार्च और अप्रैल 2026 में होने प्रस्तावित हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रियंका गांधी को कमान सौंपकर कांग्रेस महिला मतदाताओं और युवाओं को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है।

इस चुनावी जंग को और अधिक रोचक बनाने के लिए कांग्रेस ने इस बार महागठबंधन का सहारा लिया है। भाजपा की घेराबंदी करने के लिए कांग्रेस ने सीपीआई(एम), रायजोर दल, असम जातीय परिषद, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ्रेंस सहित कई क्षेत्रीय और वामपंथी दलों के साथ हाथ मिलाया है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य को देखें तो पिछली विधानसभा में भाजपा ने 64 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया था, जबकि कांग्रेस महज 26 सीटों पर सिमट गई थी।

चुनावी बिगुल फूंकते हुए असम कांग्रेस के अध्यक्ष और सांसद गौरव गोगोई ने सत्ताधारी दल पर तीखे हमले शुरू कर दिए हैं। डिब्रूगढ़ में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व वाली सरकार को तानाशाही और राजशाही का मिला-जुला रूप बताया।

गोगोई ने जनता से आह्वान किया कि यह चुनाव केवल उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि असम की आम जनता और एक अहंकारी सत्ता के बीच का संघर्ष है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार नागरिकों के मौलिक अधिकारों और सवाल पूछने की लोकतांत्रिक स्वतंत्रता को कुचल रही है। प्रियंका गांधी की सांगठनिक कुशलता और विपक्षी एकजुटता के दम पर कांग्रेस अब असम में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन को पुनः प्राप्त करने की पुरजोर कोशिश कर रही है।