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गांधीनगर में टाइफाइड का प्रकोप, अमित शाह ने लिया जायजा

विभिन्न अस्पतालों में 100 से अधिक लोग भर्ती

  • तीन दिनों के भीतर बीमारी फैल गयी

  • बीमारों में बच्चों की संख्या अधिक

  • गृह मंत्री ने जिला कलेक्टर से बात की

राष्ट्रीय खबर

गुजरात की राजधानी गांधीनगर में स्वास्थ्य संकट गहराता जा रहा है, जहाँ टाइफाइड के मामलों में आई अचानक और तीव्र वृद्धि ने राज्य प्रशासन से लेकर केंद्र सरकार तक को सतर्क कर दिया है। अहमदाबाद के निकट स्थित इस शहर में स्थिति तब चिंताजनक हो गई जब गांधीनगर सिविल अस्पताल में पिछले मात्र तीन दिनों के भीतर बच्चों सहित 104 मरीजों को टाइफाइड के संदिग्ध लक्षणों के साथ भर्ती कराया गया। शनिवार को राज्य के गृह राज्य मंत्री हर्ष संघवी ने स्वयं सिविल अस्पताल का दौरा किया और वहां के बाल रोग विभाग (पीडियाट्रिक वार्ड) में भर्ती मरीजों का हाल जाना। उन्होंने अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों और चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ स्थिति की गहन समीक्षा की।

इस स्वास्थ्य आपातकाल की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस पर व्यक्तिगत रूप से नजर रख रहे हैं। श्री शाह ने शनिवार को जिला कलेक्टर के साथ फोन पर तीन बार लंबी चर्चा की और जिले में उठाए जा रहे कदमों की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि चिकित्सा सेवाओं में किसी भी प्रकार की कोताही न बरती जाए। गृह मंत्री रविवार शाम को एक बार फिर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ स्थिति की समीक्षा करेंगे, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संक्रमण के प्रसार पर नियंत्रण पा लिया गया है।

हर्ष संघवी ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि अस्पताल में बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए 22 अनुभवी डॉक्टरों की एक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो चौबीसों घंटे मरीजों की निगरानी कर रही है। सरकार न केवल मरीजों के इलाज पर ध्यान दे रही है, बल्कि अस्पताल में मौजूद उनके परिजनों के लिए भोजन, विश्राम और अन्य बुनियादी सुविधाओं की व्यवस्था भी की गई है।

अस्पताल की मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. मीता पारिख के अनुसार, संक्रमण का सबसे अधिक प्रभाव गांधीनगर के सेक्टर 24, 25, 26, 28 और अदीवाड़ा जैसे क्षेत्रों में देखा गया है। शुरुआती जांच में इन इलाकों से लिए गए पीने के पानी के नमूनों की रिपोर्ट काफी निराशाजनक रही है। रिपोर्ट में पानी को मानवीय उपभोग के लिए पूरी तरह असुरक्षित पाया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दूषित जल आपूर्ति ही इस बीमारी की जड़ है।

इसके जवाब में, गांधीनगर नगर निगम की स्वास्थ्य टीमों ने युद्धस्तर पर अभियान छेड़ दिया है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य कर्मचारी घर-घर जाकर सर्वेक्षण कर रहे हैं ताकि छिपे हुए मामलों की पहचान की जा सके और लक्षण दिखने पर तुरंत उपचार शुरू हो सके। प्रशासन ने स्थानीय निवासियों के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है, जिसमें पानी को उबालकर पीने, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचने और केवल घर का बना ताजा भोजन करने की कड़ी सलाह दी गई है।

साथ ही, जल जनित रोगों को रोकने के लिए घर की टंकियों और सार्वजनिक जलाशयों की सफाई हेतु क्लोरीन की गोलियों का वितरण भी बड़े पैमाने पर किया जा रहा है। सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है कि निगरानी और उपचार के तंत्र को और अधिक मजबूत किया जा रहा है ताकि इस प्रकोप को जल्द से जल्द समाप्त किया जा सके।