लाल किला विस्फोट मामले की जांच का क्रम जारी
राष्ट्रीय खबर
श्रीनगर: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास हुए भीषण कार बम धमाके की गुत्थी सुलझाने की दिशा में एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। गुरुवार को एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के दक्षिणी जिले शोपियां के निवासी यासिर अहमद डार को गिरफ्तार किया। 10 नवंबर को लाल किले के गेट नंबर 3 के पास हुए इस विस्फोट के मामले में यह नौवीं औपचारिक गिरफ्तारी है।
डार को दिल्ली से पकड़ा गया और विशेष एनआईए अदालत ने उसे 26 दिसंबर तक के लिए एजेंसी की कस्टडी में भेज दिया है। एनआईए की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। यासिर अहमद डार न केवल इस साजिश का हिस्सा था, बल्कि उसने आत्मघाती हमले के लिए बाकायदा शपथ भी ली थी। वह इस आतंकी मॉड्यूल के मुख्य किरदारों, जैसे पुलवामा के डॉ. उमर उन नबी (जिसने आत्मघाती हमला किया) और वैचारिक कट्टरता फैलाने वाले मुफ्ती इरफान अहमद वागे के साथ निरंतर संपर्क में था।
इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद इसलिए भी उड़ा दी है क्योंकि इसमें शामिल लोग कोई साधारण अपराधी नहीं, बल्कि उच्च शिक्षित पेशेवर हैं। एनआईए ने इसे व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल करार दिया है। इस समूह में डॉक्टर, फार्माकोलॉजिस्ट और इंजीनियर जैसे लोग शामिल हैं, जो समाज में अपनी प्रतिष्ठित स्थिति का उपयोग युवाओं के कट्टरपंथीकरण, भर्ती और आतंकी रसद जुटाने के लिए ढाल के रूप में कर रहे थे। जांच में इस मॉड्यूल के तार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद से जुड़े होने के प्रमाण मिले हैं।
इस मामले में एनआईए अब तक देश के विभिन्न हिस्सों से कई गिरफ्तारियां कर चुकी है। डॉ. मुजम्मिल शकील गनई: फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी का डॉक्टर, जिस पर साजिश रचने का आरोप है। डॉ. शाहीन सईद (मैडम सर्जन): लखनऊ की फार्माकोलॉजिस्ट, जो कथित तौर पर महिलाओं को इस मॉड्यूल में भर्ती कर रही थी। मोहम्मद आसिफ: उत्तराखंड के हल्द्वानी की बिलाली मस्जिद का इमाम, जो वैचारिक समर्थन दे रहा था। जसिर बिलाल वानी: ड्रोन तकनीक और तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने का आरोपी।
विस्फोट में इस्तेमाल की गई हुंडई आई 20 कार में एक शक्तिशाली आईईडी का प्रयोग किया गया था, जिसमें 15 लोगों की जान गई थी। एनआईए ने जम्मू-कश्मीर के जंगलों से लेकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश तक छापेमारी कर डिजिटल उपकरण और आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए हैं। हाल ही में आरोपियों के साथ मिलकर अनंतनाग के मट्टन जंगलों में उन ठिकानों की पहचान की गई जहाँ आतंकियों को प्रशिक्षण दिया जाता था। एजेंसी अब इस नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों और सीमा पार बैठे आकाओं की तलाश में जुटी है।