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अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन गिरफ्तार

व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल की जाँच लगातार जारी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार रात अल फलाह ग्रुप के चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी को मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में गिरफ्तार कर लिया। हरियाणा स्थित इस विश्वविद्यालय समूह पर तब शिकंजा कसा गया, जब कथित तौर पर यहाँ कार्यरत तीन डॉक्टर 10 नवंबर के लाल किले की कार ब्लास्ट से जुड़े व्हाइट-कॉलर टेरर मॉड्यूल का हिस्सा पाए गए, जिसमें 13 लोग मारे गए थे। सिद्दीकी की गिरफ्तारी से कुछ घंटे पहले ही ईडी की कई टीमों ने समूह के प्रमुख संस्थानों में कथित धोखाधड़ी वाले प्रत्यायन दावों और वित्तीय अनियमितताओं के संबंध में दिल्ली और फरीदाबाद में अल फलाह ग्रुप से जुड़े 25 स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया था।

एक ईडी अधिकारी ने बताया कि सिद्दीकी को तलाशी अभियान के दौरान जुटाए गए विस्तृत जाँच और सबूतों के विश्लेषण के बाद गिरफ्तार किया गया। अधिकारी के अनुसार, सिद्दीकी 1995 से अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रबंध न्यासी रहे हैं और ट्रस्ट व उसके शैक्षणिक संस्थानों के नेटवर्क पर उनका पूरा नियंत्रण था।

ईडी अधिकारी ने कहा, न्यासियों द्वारा पारिवारिक संस्थाओं में धन के गबन और धन के लेयरिंग (परतों में छिपाने) के व्यापक सबूत अपराध की आय के सृजन और आवाजाही के पैटर्न को स्पष्ट रूप से स्थापित करते हैं। अपराध में उनकी संलिप्तता स्थापित होने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया।

अधिकारी ने बताया कि अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना 8 सितंबर, 1995 को एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट विलेख द्वारा की गई थी, जिसमें सिद्दीकी पहले न्यासियों में से एक थे और प्रबंध न्यासी नामित किए गए थे। सभी शैक्षणिक संस्थान (विश्वविद्यालय और कॉलेज) अंततः इसी ट्रस्ट के स्वामित्व में हैं और आर्थिक रूप से इसी में समेकित हैं, जिस पर सिद्दीकी का प्रभावी नियंत्रण है। अधिकारी ने कहा, पूरे अल फलाह समूह ने 1990 के दशक से अभूतपूर्व वृद्धि देखी है, जो एक बड़े शैक्षणिक निकाय में बदल गया है। हालांकि, यह वृद्धि पर्याप्त वित्तीय आधार से समर्थित नहीं है।

ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया है और अल फलाह विश्वविद्यालय में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जाँच कर रही है। सूत्रों ने बताया कि अल फलाह ट्रस्ट से जुड़ी संस्थाओं की भी संदिग्ध धन-डाइवर्जन और लेयरिंग के लिए जाँच की जा रही है।

ईडी के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि तलाशी में अल फलाह ग्रुप से जुड़ी नौ शैल कंपनियों (मुखौटा कंपनियों) की भी जाँच की गई, जो सभी एक ही पते पर पंजीकृत थीं। शुरुआती जाँच में इन कंपनियों में शैल कंपनी के व्यवहार के अनुरूप कई जोखिम संकेतक मिले, जिनमें व्यावसायिक स्थानों पर कोई भौतिक उपस्थिति नहीं होना, साझा मोबाइल नंबर/ईमेल, अपर्याप्त केवाईसी, और वेतन वितरण में विसंगतियां शामिल हैं। दिल्ली पुलिस ने भी यूजीसी की शिकायत पर दो एफआईआर दर्ज की हैं, जिनमें धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप शामिल हैं। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज़ ने अल फलाह विश्वविद्यालय की सदस्यता रद्द कर दी है।