Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
NEET-UG 2026 Paper Leak: सीबीआई की बड़ी कामयाबी, मास्टरमाइंड केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी गिरफ... Punjab Politics: पंजाब में SIR को लेकर सियासी घमासान, चुनाव आयोग की सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने उठाए... Varanasi News: दालमंडी सड़क चौड़ीकरण तेज, 31 मई तक खाली होंगी 6 मस्जिदें समेत 187 संपत्तियां धार भोजशाला में मां सरस्वती का मंदिर, मुस्लिम पक्ष के लिए अलग जमीन… जानें हाई कोर्ट के फैसले में क्य... Ahmedabad-Dholera Rail: अहमदाबाद से धोलेरा अब सिर्फ 45 मिनट में, भारत की पहली स्वदेशी सेमी हाई-स्पीड... Namo Bharat FOB: निजामुद्दीन रेलवे स्टेशन और सराय काले खां नमो भारत स्टेशन के बीच फुटओवर ब्रिज शुरू Sant Kabir Nagar News: मदरसा बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डीएम और कमिश्नर का आदेश रद्द Patna News: बालगृह के बच्चों के लिए बिहार सरकार की बड़ी पहल, 14 ट्रेड में मिलेगी फ्री ट्रेनिंग और नौ... Mumbai Murder: मुंबई के आरे में सनसनीखेज हत्या, पत्नी के सामने प्रेमी का गला रेता; आरोपी गिरफ्तार Supreme Court News: फ्यूल संकट के बीच सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, वर्चुअल सुनवाई और वर्क फ्रॉम होम ...

कई पूर्व जज, राजनयिकों ने राहुल की आलोचना की

असली मुद्दों पर लगातार चुप्पी के बाद अचानक सक्रियता

  • पत्र में कुल 272 लोगों ने हस्ताक्षर किये हैं

  • राहुल को अदालत की शरण में जाना चाहिए

  • अनर्गल आरोपों से देश में भ्रम फैल रहा

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: 200 से अधिक सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, नौकरशाहों, पूर्व सैन्य अधिकारियों और राजनयिकों के एक समूह ने कांग्रेस पार्टी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की कड़ी आलोचना की है। इस समूह ने एक खुला पत्र जारी करते हुए चुनाव आयोग के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों के लिए कांग्रेस के वोट चोरी अभियान पर निशाना साधा है।

समूह ने कहा कि ये आरोप संस्थागत संकट की आड़ में अपनी राजनीतिक हताशा को छिपाने का एक प्रयास हैं। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वाले 272 लोगों में 16 सेवानिवृत्त न्यायाधीश, 123 पूर्व नौकरशाह, 133 सेवानिवृत्त सेना अधिकारी और 14 पूर्व राजदूत शामिल हैं। वैसे इन तमाम लोगों के इस पत्र की जबर्दस्त आलोचना हो रही हैं क्योंकि यह सारे लोग अब तक देश के ज्वलंत मुद्दों पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रहे हैं। नाराज जनता यह भी मान रही है कि पत्र में हस्ताक्षर करने वालों को अपने खिलाफ जांच का भय भी शायद परेशान कर रहा है।

खुले पत्र में कहा गया है, हम, नागरिक समाज के वरिष्ठ नागरिक, अपनी गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं कि भारत का लोकतंत्र खतरे में है, लेकिन किसी बाहरी बल से नहीं, बल्कि इसकी मूलभूत संस्थाओं के खिलाफ निर्देशित जहरीले बयानबाजी की बढ़ती लहर से। कुछ राजनीतिक नेता वास्तविक नीतिगत विकल्प देने के बजाय अपनी नाटकीय राजनीतिक रणनीति में उत्तेजक लेकिन निराधार आरोपों का सहारा ले रहे हैं। पत्र में आगे कहा गया है कि भारतीय सशस्त्र बलों और न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल उठाने के बाद, अब भारत के चुनाव आयोग (ECI) की अखंडता और प्रतिष्ठा पर व्यवस्थित और षड्यंत्रकारी हमले किए जा रहे हैं।

कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि वह कथित वोट धोखाधड़ी को सुविधाजनक बनाने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा के साथ मिलीभगत कर रहा है। भाजपा और चुनाव निकाय ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। गांधी की आलोचना करते हुए, पत्र में कहा गया है कि उन्होंने बार-बार चुनाव आयोग पर हमला किया है और दावा किया है कि उनके पास सबूत हैं कि चुनाव आयोग वोट चोरी में शामिल है।

पत्र में कांग्रेस नेता की टिप्पणियों को अविश्वसनीय रूप से अभद्र बयानबाजी बताया गया है। पत्र में सवाल उठाया गया है कि इतने तीखे आरोपों के बावजूद, उन्होंने अपनी जवाबदेही से बचने के लिए निर्धारित शपथ पत्र के साथ कोई औपचारिक शिकायत दर्ज क्यों नहीं की है।

पत्र में पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन शेषन और एन गोपालस्वामी का भी उल्लेख किया गया है, जिनके नेतृत्व में आयोग एक मजबूत संवैधानिक प्रहरी बना। पत्र के अंत में कहा गया है, हम चुनाव आयोग से पारदर्शिता और कठोरता के अपने रास्ते पर चलते रहने का आह्वान करते हैं। हम राजनीतिक नेताओं से संवैधानिक प्रक्रिया का सम्मान करने और निराधार आरोपों के बजाय नीतिगत अभिव्यक्ति के माध्यम से प्रतिस्पर्धा करने का आह्वान करते हैं।