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डोनाल्ड ट्रंप की अपील बेअसर होने के बाद चीनी हस्तक्षेप

थाईलैंड-कंबोडिया संघर्ष में मध्यस्थता की पेशकश

  • पोइपेट के इलाके में भारी बमबारी ही है

  • ट्रंप का दावा वास्तव में गलत निकला

  • चीन ने दोनो देशों को अपना प्रस्ताव दिया

बैंकॉक: दक्षिण-पूर्व एशिया के दो पड़ोसी देशों, थाईलैंड और कंबोडिया के बीच सीमा विवाद ने गुरुवार को एक हिंसक और खतरनाक मोड़ ले लिया है। कंबोडियाई रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर थाईलैंड की सेना पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कंबोडिया का दावा है कि थाई लड़ाकू विमानों और तोपखाने ने पोइपेट के पास स्थित कैसिनो हब और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर भारी बमबारी की है। पोइपेट दोनों देशों के बीच न केवल एक प्रमुख भूमि सीमा पारगमन बिंदु है, बल्कि यह व्यापार और पर्यटन का एक बड़ा केंद्र भी है। इस हमले के बाद सीमावर्ती क्षेत्रों में अफरा-तफरी का माहौल है और धुएं के गुबार देखे जा सकते हैं।

यह ताज़ा सैन्य झड़प ऐसे समय में हुई है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय शांति की उम्मीद कर रहा था। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि उनके हस्तक्षेप के बाद दोनों देशों के बीच युद्धविराम पर सहमति बन गई है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत है। थाईलैंड ने कड़ा रुख अपनाते हुए शर्त रखी है कि जब तक कंबोडिया की ओर से युद्धविराम की औपचारिक पहल और घोषणा नहीं की जाती, तब तक उनकी सेना पीछे नहीं हटेगी। दावों और जवाबी हमलों के इस दौर ने शांति की किसी भी तत्काल संभावना को धूमिल कर दिया है।

क्षेत्र में बिगड़ते हालात और एक बड़े युद्ध की आहट को देखते हुए चीन ने अब मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश की है। चीन के एशियाई मामलों के विशेष दूत डेंग शिजुन आज ही बैंकॉक और नोम पेन्ह के आपातकालीन दौरे पर पहुँचे हैं। बीजिंग का उद्देश्य दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व को मेज पर लाना और कूटनीतिक बातचीत का रास्ता फिर से खोलना है। चूंकि चीन का दोनों देशों में बड़ा आर्थिक निवेश है, इसलिए उसकी मध्यस्थता को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दूसरी ओर, पश्चिमी देशों और भारत ने भी इस संघर्ष पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है, जिसमें उन्हें कंबोडिया-थाईलैंड सीमा के 50 किलोमीटर के दायरे से तुरंत दूर रहने को कहा गया है। अमेरिका ने स्थिति को अत्यधिक अस्थिर और अप्रत्याशित करार दिया है। भारत सरकार ने भी इस मामले में गहरी चिंता जताई है। बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीय पर्यटकों और वहां रह रहे प्रवासियों के लिए एक विस्तृत ट्रैवल एडवाइजरी जारी की है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों से दोनों पक्षों को हिंसा त्यागने और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की पुरजोर अपील की है।

सीमा पर जारी इस सैन्य गतिरोध का मानवीय और आर्थिक पक्ष भी अत्यंत दर्दनाक है। बमबारी के डर से सीमावर्ती गांवों के हजारों लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह ठप हो गई हैं, जिससे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को करोड़ों डॉलर का नुकसान हो रहा है। क्षेत्रीय विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि अगले 48 घंटों में कोई ठोस कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह द्विपक्षीय संघर्ष एक विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है। फिलहाल दोनों ओर की सेनाएं भारी हथियारों और टैंकों के साथ मोर्चे पर डटी हुई हैं।