छिन्दवाड़ा : गुलाबी साड़ी हाथ में डंडा और गले में धारा 151 लिखे पोस्टर, छिंदवाड़ा की सड़कों पर महिलाओं को इस तरह देख हर किसी के मन में बस यही सवाल है. आखिर छिंदवाड़ा की महिलाओं को ये क्या हुआ? माजरा तब समझ आया जब महिलाएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं और धरना देने लगीं. जब अधिकारियों ने प्रदर्शन का कारण पूछा पता चला कि महिलाएं जब अवैध शराब बिक्री के विरोध में आंदोलन करती हैं तो उन पर धारा 151 लगाकर जेल भेज दिया जाता है. इसलिए आंदोलन से पहले ही वे खुद धारा 151 का पोस्टर लटकाकर घूम रही हैं.
अवैध शराब बिक्री का अनोखा विरोध
गुलाबी गैंग की महिलाओं ने चौरई के आदिवासी बाहुल्य ग्राम पठरा जंगली माल में अवैध शराब की बिक्री का आरोप लगाते हुए इस कार्रवाई करने की मांग की है. इशे लिए महिलाओं ने धारा 151 का पोस्टर लगाकर जिला आबकारी अधिकारी सहित राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, आबकारी मंत्री व महिला आयोग, मानव अधिकार आयोग, अनुसूचित जनजाति आयोग सहित कई विभागों के नाम ज्ञापन सौंपा. कमाण्डर पूर्णिमा वर्मा ने बताया, ” जिले लंबे समय से अवैध रूप से शराब दुकानों का संचालन हो रहा है और हर दूसरे-तीसरे घर में अवैध रूप से कुचियाओं का संचालन हो रहा है. गांव के गांव शराब बनाकर बेच रहे हैं.”
धारा 151 की वजह से भेजा गया था जेल
इसके पहले भी गुलाबी गैंग ने जिले में अवैध शराब बिक्री का आरोप लगाते हुए छिंदवाड़ा की कुछ दुकानों में तोड़फोड़ कर दी थी, जिसके बाद धारा 151 की कार्रवाई करते हुए गुलाबी गैंग की पूर्णिमा वर्मा को जेल भी भेजा गया था. पूर्णिमा वर्मा ने कहा, ” शराब माफियाओं से निवेदन किया और न मानने पर धरना, आंदोलन कर दुकानों को बंद कराने का प्रयास किया गया था लेकिन जिला प्रशासन द्वारा उल्टा शराब माफियाओं के दबाव में आकर मुझ पर ही झूठा प्रकरण बनाकर जेल भिजवा दिया जाता है. जेल में कई दिनों तक अनावश्यक ही बंद रखकर मुझे मानसिक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है.
कानून व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप
गुलाबी गैंग भले ही अवैध शराब दुकानों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन कर रही हो पर गैंग पर कानून व्यवस्था बिगाड़ने के भी आरोप लगे हैं. कोतवाली थाना प्रभारी आशीष धुर्वे ने बताया, ”गुलाबी गैंग के द्वारा पहले भी शांति व्यवस्था भंग करने का प्रयास करते हुए कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की गई थी. दुकानदारों और लोगों की शिकायत पर मामला कायम का न्यायालय में पेश किया गया था, जहां से आगे की कार्रवाई न्यायालय के द्वारा की गई थी.