पंजाब ग्रामीण चुनाव में आम आदमी पार्टी को स्पष्ट बढ़त
राष्ट्रीय खबर
चंडीगढ़: पंजाब में हाल ही में संपन्न हुए जिला परिषद और ब्लॉक समिति चुनावों के परिणामों ने राज्य की ग्रामीण राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ ला दिया है। सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी (आप) द्वारा सरकारी मशीनरी के कथित दुरुपयोग और सत्ता के दबाव के आरोपों के बावजूद, शिरोमणि अकाली दल ने अपने पारंपरिक ग्रामीण आधार को बचाने में सफलता पाई है। जहाँ आप इन चुनावों में सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरी है, वहीं अकाली दल ने कई महत्वपूर्ण सीटों पर जीत दर्ज कर यह साबित कर दिया है कि पंजाब की ग्रामीण राजनीति में उसकी जड़ें अब भी गहरी हैं।
अकाली दल के उम्मीदवारों ने संधवान, जगदेव कलां और अटारी जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावशाली जीत हासिल की। विशेष रूप से संधवान ब्लॉक समिति की सीट पर कड़ा मुकाबला देखा गया, जहाँ अकाली दल के मोहिंदर सिंह ने आप के उम्मीदवार मुख्तियार सिंह को 171 मतों के अंतर से पराजित किया। हालांकि कुल सीटों के मामले में आम आदमी पार्टी शीर्ष पर रही, लेकिन मुख्य विपक्षी दल के रूप में दूसरे स्थान के लिए अकाली दल ने कड़ी टक्कर दी और कई जगहों पर कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया।
अकाली दल के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य चुनाव आयोग सरकार के इशारे पर काम कर रहा था। चीमा ने दावा किया कि आप ने सत्ता का दुरुपयोग कर कई सीटों पर अपने उम्मीदवारों को अनुचित तरीके से निर्विरोध विजेता घोषित करवाया। उन्होंने विशेष रूप से तरनतारन जिले का उल्लेख करते हुए कहा कि वहाँ की 60 प्रतिशत से अधिक जिला परिषद सीटें इसी तरह आप की झोली में डाल दी गईं।
दूसरी ओर, शिरोमणि अकाली दल (सुधार) ने भी इन चुनावों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इस बीच, वारिस पंजाब दे के प्रमुख अमृतपाल सिंह के पिता तरसेम सिंह ने निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने पारंपरिक राजनीतिक दलों पर चुनावों को धनबल और भय के दम पर प्रभावित करने का आरोप लगाया और गिरते मतदान प्रतिशत को लोकतंत्र के लिए एक चिंताजनक संकेत बताया। वहीं, वडाला गुट की ओर से यह संकेत दिया गया है कि यदि पंथ और पंजाब के हितों के लिए श्री अकाल तख्त साहिब से आदेश आता है, तो अकाली दल के विभिन्न गुटों का विलय संभव है।