अमेरिका के बाद अब इस देश में भी प्रवासियों की चिंता बढ़ी
लंदनः एक नई रिपोर्ट ने ब्रिटेन में एक बड़ा सामाजिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में रहने वाले लाखों मुसलमानों, जिनमें भारतीय मूल के मुसलमान भी शामिल हैं, की नागरिकता छीनी जा सकती है या उन्हें अपनी नागरिकता को लेकर गंभीर कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। यह चिंता ब्रिटेन के जटिल और अक्सर विवादास्पद नागरिकता कानूनों से उपजी है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन लोगों ने अपनी नागरिकता की पुष्टि के लिए आवश्यक दस्तावेजों को ठीक से पूरा नहीं किया है या जिनके माता-पिता का जन्म ब्रिटेन से बाहर हुआ है, उन्हें खास तौर पर खतरा है। इसमें उन लोगों की बड़ी संख्या शामिल है जो दशकों से ब्रिटेन में रह रहे हैं, लेकिन उनकी नागरिकता की स्थिति कानूनी रूप से कमजोर है। यह स्थिति कई ब्रिटिश-मुसलमानों, विशेषकर दक्षिण एशियाई मूल के लोगों के बीच व्यापक भय और अनिश्चितता पैदा कर रही है।
इस मामले में विंड्रश कांड की गूँज सुनाई देती है, जहाँ कैरिबियन देशों से आए लोगों को भी इसी तरह नागरिकता की समस्याओं का सामना करना पड़ा था। मानवाधिकार संगठनों ने इस रिपोर्ट पर गंभीर चिंता व्यक्त की है और सरकार से नागरिकता कानूनों की समीक्षा करने का आग्रह किया है, ताकि किसी भी समुदाय को अनावश्यक रूप से निशाना न बनाया जाए। उनका तर्क है कि मौजूदा कानूनी ढांचा भेदभावपूर्ण है और यह अल्पसंख्यक समुदायों के बीच अविश्वास पैदा करता है।
ब्रिटेन में प्रवासन और नागरिकता हमेशा से एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा रहा है। इस रिपोर्ट के बाद, सरकार पर दबाव बढ़ गया है कि वह उन लोगों को सुरक्षा प्रदान करे जो ईमानदारी से ब्रिटेन में रह रहे हैं और देश के विकास में योगदान दे रहे हैं। यह मुद्दा ब्रिटिश समाज में नस्लीय समानता और कानूनी न्याय की बहस को फिर से केंद्र में ले आया है। कई मुस्लिम समूह और नागरिक अधिकार संगठन अब इन प्रभावित लोगों को कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए एकजुट हो रहे हैं।