Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Crime News: मामूली विवाद में बग्घी चालक की चाकू से गोदकर हत्या, पुलिस ने 4 आरोपियों को किया गिरफ्तार MP के बिजली उपभोक्ताओं की चांदी! अब 15 मई तक उठाएं विद्युत समाधान योजना का लाभ; ऊर्जा मंत्री का बड़ा... Ujjain Tepa Sammelan: अंतरराष्ट्रीय मूर्ख दिवस पर उज्जैन में जमकर उड़े ठहाके, 'टेपा सम्मेलन' में कवि... रीवा में इंसानियत शर्मसार! किडनी ट्रांसप्लांट के नाम पर 56 लाख की ठगी, पुलिस ने हरदा से दबोचा शातिर ... MP News: मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी पर मचा घमासान, भारतीय किसान संघ ने 15 मई से आंदोलन का किया ऐलान Sidhi News: सीधी कलेक्टर ने रात में किया औचक निरीक्षण, जमीन पर बैठकर सुनीं समस्याएं; ताबड़तोड़ आदेश ... बड़ी खबर! 22 हजार स्कूलों की 1.22 लाख सीटों पर आज निकलेगी लॉटरी, आपके बच्चे को मिलेगा फ्री एडमिशन? ग्वालियर के मरीजों की चांदी! अब फ्री जैसे दाम में होगा ऑपरेशन, सालों से धूल खा रही मशीन हुई शुरू Satna News: सतना में जवारे विसर्जन से लौट रहे श्रद्धालुओं पर लाठी-डंडों से हमला, एक की हालत गंभीर Bhopal Weather Update: अप्रैल में तपती थी भोपाल की धरती, इस बार क्यों है राहत? देखें पिछले 10 साल का...

दिल्ली के स्कूलों में फीस रेगुलेशन लागू! अब नहीं चलेगी मनमानी, 15% अभिभावकों की शिकायत पर स्कूल के खिलाफ होगा सख्त एक्शन

दिल्ली सरकार ने निजी स्कूलों में मनमानी फीस पर रोक लगाने के लिए बनाए गए दिल्ली स्कूल एजुकेशन (फीस तय करने और नियमन) एक्ट, 2025 को आधिकारिक रूप से नोटिफाई कर दिया है. एलजी वीके सक्सेना ने इसकी गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है.

इस कानून के दायरे में अब दिल्ली के 1500 से ज्यादा निजी अनएडिड स्कूल आ गए हैं. इस कानून के तहत तीन स्तर की निगरानी व्यवस्था, स्कूल-स्तरीय फीस रेगुलेशन कमेटी, जिला फीस अपीलेट कमेटी और रिवीजन कमेटी बनाई जाएगी. यानी किसी भी फीस विवाद की सुनवाई अब तीन स्तर पर होगी.

शिकायत के लिए होगी 15 फीसद अभिभावकों जरुरत

इस नए कानून में स्कूल के खिलाफ जिला कमेटी में शिकायत दर्ज कराने के लिए कम से कम 15 फीसद अभिभावकों का समर्थन जरूरी होगा. कानून के मुताबिक स्कूल सिर्फ वही फीस ले सकता है, जो साफ रूप से तय और मंजूर हो. स्कूल हर फीस हेड को अलग-अलग और साफ तरीके से बताना होगा. एक्सेस फीस यानी जरूरत से ज्यादा फीस लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है.

साथ ही ट्यूशन फीस से बिल्डिंग या इंफ्रास्ट्रक्चर का खर्च नहीं ट्यूशन फीस में सिर्फ रोजमर्रा के खर्च और पढ़ाई से जुड़े खर्च शामिल होंगे. बिल्डिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर या किसी बड़ी पूंजीगत खर्च की भरपाई ट्यूशन फीस से नहीं की जा सकेगी.

कैसे बनेगी स्कूल-स्तरीय कमेटी?

स्कूल-स्तरीय कमेटी में अभिभावक (महिला और कमजोर वर्ग का प्रतिनिधित्व जरूरी), शिक्षक (लकी ड्रॉ से चयन), प्रबंधन प्रतिनिधि (चेयरपर्सन), प्रिंसिपल (मेंबर सेक्रेटरी) और शिक्षा विभाग का एक पर्यवेक्षक शामिल होगा. कमेटी हर तीन साल के लिए स्कूल की फीस संरचना को मंजूरी देगी. स्कूल को फीस बढ़ाने का प्रस्ताव भेजते समय ऑडिटेड फाइनेंशियल स्टेटमेंट देना अनिवार्य होगा.

जिला और रिवीजन कमेटी की क्या होगी भूमिका?

इस कानून के तहत बनाई जाने वाले जिला कमेटी हर साल 15 जुलाई को बनाई जाएगी. सभी मामलों का निपटारा 30 जुलाई तक करना होगा. जिला स्तर के फैसले के बाद 3045 दिनों के भीतर अपील रिवीजन कमेटी में होगी.

रिवीजन कमेटी 45 दिनों में फैसला सुनाएगी, जो अंतिम और 3 साल तक लागू रहेगा. अगर 45 दिनों में समाधान नहीं हुआ, तो केस अपने-आप अपीलेट कमेटी के पास चला जाएगा.