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ईरान में न्याय की जीत! सुप्रीम कोर्ट ने रद्द की 40 साल की महिला की मौत की सजा, 4 साल की कानूनी लड़ाई के बाद झुका ईरान

ईरान की राजनीतिक कैदी वरीशे मोरादी (जिन्हें जोवाना सनेह भी कहा जाता है) को मिली मौत की सजा को अब ईरान के सर्वोच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है. यह जानकारी उनके वकील मुस्तफा नीली ने दी. उन्होंने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला इसलिए बदला क्योंकि पहले हुई जांच में कई गलतियां और कानूनी कमी पाई गईं. अदालत ने माना कि जिस आधार पर मौत की सजा दी गई थी, वह आरोप जांच के दौरान सही तरीके से स्पष्ट ही नहीं किए गए थे.

फैसला रद्द होने के बाद यह मामला फिर से तेहरान की क्रांतिकारी अदालत की शाखा 15 को भेजा गया है. इस अदालत के प्रमुख अबोलघासेम सलावती हैं. ध्यान देने की बात है कि पहली मौत की सजा भी इसी अदालत और इसी जज ने सुनाई थी. वरीशे मोरादी को 1 अगस्त 2023 को सशस्त्र विद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. गिरफ्तारी के दौरान उन्हें सनंदज के पास बुरी तरह पीटा गया. बाद में 10 नवंबर 2024 को उन्हें विद्रोही होने के आरोप में मौत की सजा दे दी गई.

जेल में 20 दिन की भूख हड़ताल की थी

वरीशे मोहादी ने अगस्त 2024 में मोरादी ने जेल में ही अपना लिखित बचाव तैयार किया. उन्होंने ईरानी जनता के नाम एक पत्र भी लिखा, जिसमें लोगों से अपील की कि वे उनके काम और उनकी भूमिका का मूल्यांकन सामाजिक न्याय के आधार पर करें. मोरादी ने लिखा, ISIS हमारा सिर काट रहा है और इस्लामी गणराज्य हमें फांसी दे रहा है. कोई भी राजनीतिक या कानूनी ज्ञान इस विरोधाभास को नहीं समझा सकता. मोरादी ने सजा के खिलाफ जेल में 20 दिन की भूख हड़ताल भी की थी.

सजा के खिलाफ ईरान के आम लोग

जेल में रहने के दौरान मोरादी को जरूरी चिकित्सा सुविधा और उनके बुनियादी अधिकार नहीं दिए गए. पिछले एक साल में उनकी मौत की सजा के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन होते रहे. कई नागरिक कार्यकर्ता, वकील, राजनीतिक लोग और कई कैदियों ने बयान जारी करके मांग की कि मोरादी की फांसी तुरंत रोकी जाए. 240 नागरिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने मोरादी को मौत की सजा देने के गंभीर खतरे के बारे में चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि मोरादी महिला अधिकार कार्यकर्ता हैं और ISIS के खिलाफ लड़ रही हैं.

ईरान में राजनीतिक कैदियों पर मौत पर खतरा

ईरान में आम आपराधिक मामलों में रोज फांसी दी जाती है. इस देश में करीब 70 राजनीतिक कैदी ऐसे हैं, जिन्हें कभी भी फांसी दी जा सकती है. इसके अलावा 100 से ज्यादा लोग ऐसे हैं, जिन पर राजनीतिक आरोपों में मौत की सजा मिलने का खतरा मंडरा रहा है.