थाईलैंड-कंबोडिया सीमा संघर्ष अब भी जारी
बैंकॉकः थाईलैंड और कंबोडिया के बीच एक लंबे समय से विवादित सीमा क्षेत्र पर संघर्ष लगातार तीसरे दिन भी जारी रहा, जिसके कारण 5 लाख से अधिक लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। यह संघर्ष एक सदियों पुराने मंदिर परिसर के नियंत्रण को लेकर छिड़ा है, जो दोनों देशों की राष्ट्रीय अस्मिता का विषय है।
नवीनतम झड़पें तब शुरू हुईं जब सीमा पर तैनात दोनों देशों की सेनाओं के बीच अचानक गोलीबारी शुरू हो गई, जो जल्द ही तोपखाने और रॉकेट हमलों में बदल गई। सीमावर्ती गाँव और कस्बे इस संघर्ष का केंद्र बन गए हैं, जहाँ से नागरिक लगातार भाग रहे हैं। विस्थापित लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएँ, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं, जिन्हें मानवीय सहायता की तत्काल आवश्यकता है।
संयुक्त राष्ट्र और रेड क्रॉस जैसी अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने संघर्ष विराम का आह्वान किया है और मानवीय गलियारे बनाने की मांग की है ताकि फंसे हुए नागरिकों को निकाला जा सके और आवश्यक राहत सामग्री पहुँचाई जा सके। विस्थापितों को थाईलैंड और कंबोडिया दोनों तरफ अस्थायी शिविरों में रखा गया है, जहाँ उन्हें भोजन, पानी, चिकित्सा देखभाल और आश्रय जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
शिविरों में भीड़भाड़ और साफ-सफाई की कमी के कारण संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है। दोनों देशों की सरकारों ने एक-दूसरे पर संघर्ष शुरू करने का आरोप लगाया है, जबकि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय इस मुद्दे पर मध्यस्थता करने के लिए संघर्ष कर रहा है। क्षेत्रीय कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन सीमा पर तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह संघर्ष केवल एक मंदिर के बारे में नहीं है, बल्कि यह दोनों देशों के बीच व्यापक भू-राजनीतिक तनाव और जल संसाधनों के नियंत्रण जैसे मुद्दों से जुड़ा हुआ है। जब तक दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर नहीं आते और एक स्थायी सीमा समाधान पर सहमत नहीं होते, तब तक इस क्षेत्र में शांति स्थापित होना मुश्किल है। विस्थापित हुए नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है और उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। बच्चों की शिक्षा और लोगों की आजीविका पूरी तरह से बाधित हो गई है, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट पैदा हो गया है।